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खास खबर

बाइक फिसलने से हादसा, 17 वर्षीय किशोर की मौत

स्कूल के पास बाइक अनियंत्रित होकर सड़क पर गिरी अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने मृत घोषित किया सरायमीर थाना क्षेत्र के मदरसा बैतूल उलूम के पास रविवार शाम बाइक फिसलने से हुए हादसे में पीछे बैठे 17 वर्षीय किशोर की मौत हो गई। हादसे के बाद परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। घटना से परिवार में कोहराम मचा है। साइज़ाना गांव निवासी रियाजुद्दीन का 17 वर्षीय पुत्र यासीन रविवार शाम अपने साथी सलमान के साथ बाइक से जा रहा था। बताया गया कि शाम करीब सात बजे मदरसा बैतूल उलूम के पास अचानक बाइक फिसल गई। इससे बाइक सवार दोनों सड़क पर गिर गए। हादसे में पीछे बैठे यासीन को गंभीर चोटें आईं। परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले गए, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यासीन तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था। किशोर की मौत की खबर मिलते ही घर में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, थाना प्रभारी भुवनेश कुमार चौबे ने बताया कि घटना की उन्हें जानकारी नहीं है।

ग्रामीण खिलाड़ियों को संसाधन नहीं, दर-दर भटकने को मजबूर : अमरजीत

बोले- गांवों में खेल मैदान और सुविधाएं उपलब्ध हों तो देश को मिल सकती हैं नई खेल प्रतिभाएं

आजमगढ़। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं और संसाधनों के अभाव में प्रतिभावान खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। उन्हें अभ्यास के लिए मैदान से लेकर जरूरी खेल उपकरण तक के लिए भटकना पड़ता है। भगत सिंह खेल अकादमी निजामाबाद के संस्थापक एवं राष्ट्रीय पहलवान अमरजीत यादव ने कहा कि देश की बड़ी आबादी गांवों में निवास करती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा के साथ खेल सुविधाओं का भी भारी अभाव है।

उन्होंने कहा कि देश के लिए खेल के क्षेत्र में सबसे बड़ा समर्पण और त्याग करने वालों में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का नाम सबसे ऊपर है। सामान्य परिवार में जन्म लेकर गुलामी के दौर में भी अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया। इसके बावजूद उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन आज तक उन्हें भारत रत्न नहीं मिलना खिलाड़ियों के लिए चिंता का विषय है।
अमरजीत यादव ने कहा कि मेजर ध्यानचंद के सपनों का भारत तभी साकार होगा, जब ग्रामीण क्षेत्रों के बालक और बालिकाओं को कुश्ती, कबड्डी, एथलेटिक्स, हॉकी, वॉलीबाल समेत अन्य खेलों के लिए गांव स्तर पर बेहतर मैदान, प्रशिक्षक और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। खिलाड़ियों को जिला, मंडल, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए सरकार को ठोस योजना बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ओलंपिक, एशियन और राष्ट्रमंडल खेलों से लौटने के बाद खिलाड़ियों और खेलों के लिए होने वाली घोषणाओं के साथ यदि ग्रामीण अंचलों में खेल सुविधाओं पर भी पर्याप्त धन खर्च किया जाए तो देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। कमी सिर्फ प्रतिभा को पहचानने और उसे निखारने की है।

उन्होंने बताया कि भगत सिंह खेल अकादमी के सदस्यों ने आजमगढ़ के प्रत्येक ब्लॉक में खेल-खिलाड़ी संकल्प जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके माध्यम से बालकों के साथ बालिकाओं को भी खेलों में समान अवसर दिलाने का प्रयास किया जाएगा। अमरजीत यादव ने कहा कि खेलों से युवाओं में अनुशासन, नैतिकता, देशभक्ति और स्वाभिमान का विकास होता है। उन्होंने कहा कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की मांग को लेकर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को एकजुट होना चाहिए। साथ ही हर गांव में खेल मैदान और जरूरी खेल संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए

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