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🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ 🚨 बरदह में विवाहिता की संदिग्ध मौत, पशुशाला में फंदे से लटका मिला शव

मायके पक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की जांच आजमगढ़। बरदह थाना क्षेत्र के सकरा मऊ गांव में मंगलवार तड़के 25 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उसका शव घर के बाहर स्थित पशुशाला के टिन शेड में लोहे की पाइप से नायलॉन की रस्सी के सहारे लटका मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मृतका की पहचान वर्षा विश्वकर्मा (25) पत्नी जयहिंद विश्वकर्मा के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब चार बजे घटना की जानकारी होने पर पति और सास ने उसे फंदे से नीचे उतारा और उपचार के लिए जौनपुर ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी लालगंज भूपेश पांडेय, मार्टीनगंज के नायब तहसीलदार अरुण कुमार कोल, थानाध्यक्ष चन्द्रदीप कुमार तथा फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। मृतका के पिता रामफेर विश्वकर्मा, निवासी पचेवरा (थाना गौरा बादशाहपुर, जौनपुर) ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 में विवाह के बाद ...

'गोल्डन आवर' में मिलेगी जिंदगी की नई उम्मीद, बाइक एंबुलेंस से घटेगा इलाज का इंतजार

ट्रैफिक जाम, संकरी गलियों और दुर्गम क्षेत्रों में पहले पहुंचेगी प्राथमिक चिकित्सा




नई दिल्ली। देश में हर साल सड़क हादसों, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर आपात स्थितियों में कई मरीज समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण जान गंवा देते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ट्रैफिक जाम, संकरी गलियां और दूरदराज के इलाकों तक एंबुलेंस का समय पर नहीं पहुंच पाना है। इसी समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार पहली बार बाइक एंबुलेंस को राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी पहचान देने की तैयारी कर रही है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बाइक एंबुलेंस का मुख्य उद्देश्य मरीज को लंबी दूरी तक ले जाना नहीं, बल्कि 'गोल्डन आवर' के दौरान सबसे पहले मौके पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना होगा। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार हादसे या हार्ट अटैक के बाद शुरुआती एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान समय पर प्राथमिक उपचार मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। सरकार ने दोपहिया एंबुलेंस के लिए एआईएस-209 मानक का मसौदा जारी किया है। इसके तहत बाइक पर प्राथमिक जीवन रक्षक उपकरण, आपातकालीन चेतावनी लाइट, मरीज की सुरक्षा के इंतजाम और आवश्यक चिकित्सा किट उपलब्ध रहेगी। जरूरत पड़ने पर मरीज को नजदीकी सुरक्षित स्थान तक पहुंचाकर वहां से बड़ी एंबुलेंस में स्थानांतरित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था केवल महानगरों के ट्रैफिक जाम में ही नहीं, बल्कि गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों, जंगलों और धार्मिक आयोजनों जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर भी जीवनरक्षक साबित हो सकती है। इससे 108 जैसी मौजूदा एंबुलेंस सेवाओं को भी अधिक प्रभावी सहयोग मिलेगा। देश के कुछ राज्यों में सीमित स्तर पर बाइक एंबुलेंस पहले से संचालित हैं, लेकिन अब पहली बार इनके निर्माण, पंजीकरण, सुरक्षा और संचालन के लिए पूरे देश में एक समान नियम लागू किए जाने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि इससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की पहुंच और प्रतिक्रिया समय में उल्लेखनीय सुधार होगा।
कई राज्यों में चल रही है बाइक एंबुलेंस सेवा
भारत में हैदराबाद, गोवा, केरल, कर्नाटक और कुछ अन्य राज्यों में सीमित स्तर पर बाइक एंबुलेस सेवाएं पहले से संवालित हो रही हैं। इनका उपयोग विशेष रूप से ट्रैफिक जाम, समुद्र तटीय इलाकों, धार्मिक आयोजनों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा पहुंचाने के लिए किया जाता है। हालांकि इनके संचालन के लिए अभी तक कोई एकीकृत राष्ट्रीय मानक नहीं था।


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