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तमिलनाडु की महिला से 21,999 की साइबर ठगी, जांच में आजमगढ़ तक पहुंचे तार

सोशल मीडिया पर निवेश का झांसा देकर की गई ठगी आजमगढ़ के बैंक खाते में पहुंची रकम दो युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति आजमगढ़। सोशल मीडिया पर निवेश के नाम पर अधिक मुनाफे का लालच देकर तमिलनाडु की एक महिला से ₹21,999 की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायत की जांच के दौरान ठगी की रकम का लिंक आजमगढ़ के एक बैंक खाते से जुड़ा मिलने पर पुलिस ने दो युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की है।  जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु निवासी जोसेफिन लाथा ने 10 फरवरी 2026 को एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर निवेश से अधिक लाभ दिलाने वाले एक विज्ञापन पर भरोसा कर विभिन्न माध्यमों से कुल ₹21,999 जमा किए थे। बाद में उन्हें पता चला कि यह पूरा निवेश फर्जी था और उनके साथ साइबर ठगी की गई है। तकनीकी जांच के दौरान साइबर टीम को पता चला कि ठगी की गई धनराशि का एक हिस्सा आजमगढ़ निवासी अनुल यादव के बैंक खाते में स्थानांतरित हुआ था। इसके बाद पुलिस ने संबंधित खाते की जांच कर अनुल यादव को पूछताछ के लिए...

निजामाबाद के पूर्व विधायक आलम बदी आज़मी का निधन, आजमगढ़ में शोक की लहर

पांच बार रहे विधायक, सादगी और ईमानदार राजनीति के लिए पूरे प्रदेश में थी अलग पहचान

आजमगढ़। निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता आलम बदी आज़मी का बुधवार रात निधन हो गया। वह कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही आजमगढ़ समेत पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और हजारों समर्थकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

आलम बदी आज़मी का जन्म वर्ष 1936 में आजमगढ़ के बिंदवल, जयराजपुर (बिलरियागंज) में हुआ था। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने गोरखपुर में नौकरी की, लेकिन महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस के विचारों से प्रेरित होकर समाजसेवा और राजनीति को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्ष 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर पहली बार निजामाबाद विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद वह कुल पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए जनता के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाने में सफल रहे। साल 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें मंत्री पद की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया कि वह अपने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। उनके इस निर्णय ने उन्हें जननेता के रूप में अलग पहचान दिलाई। आलम बदी आज़मी अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए भी जाने जाते थे। साधारण कुर्ता-पायजामा, पैरों में चप्पल, कान में सुनने की मशीन और हाथ में कीपैड मोबाइल उनकी पहचान थे। वह बिना किसी तामझाम के लोगों से मिलते थे और अक्सर पैदल ही क्षेत्र का भ्रमण कर जनता की समस्याएं सुनते थे। उन्होंने राजनीति को मेशा जनसेवा का माध्यम माना। ईमानदारी, पारदर्शिता और जनता के प्रति समर्पण उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषताएं रहीं। उनके निधन से आजमगढ़ ने एक ऐसे जननेता को खो दिया है, जिनकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की मिसाल लंबे समय तक याद की जाएगी।

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