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खास खबर

टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में आजमगढ़ कनेक्शन

कोठियार की युवती पर हथियार पहुंचाने का आरोप कई राज्यों की पुलिस कर रही जांच आजमगढ़। अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले की जांच के दौरान आजमगढ़ के तहबरपुर क्षेत्र स्थित कोठियार गांव की रहने वाली बबीता का नाम सामने आया है। हथियारों की डिलीवरी में कथित भूमिका के आरोप में गिरफ्तार 23 वर्षीय बबीता हरियाणा के सोनीपत में निजी सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करती थी। मामले की जांच में सहयोग कर रही आजमगढ़ पुलिस उसकी पृष्ठभूमि की जानकारी जुटा रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार कथित शूटरों की मदद करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश के सीतापुर की राधा और आजमगढ़ की बबीता भी शामिल हैं। आरोप है कि दोनों महिलाओं ने हथियार मुंबई पहुंचाए और वहां एक नाबालिग को सौंपे। हालांकि, इस भूमिका और घटनाक्रम की जानकारी को लेकर जांच एजेंसियों की ओर से अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। तीन साल पहले सोनीपत गई थी बबीता आजमगढ़ के एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि मुंबई, दिल्ली और हरियाणा पुलिस के अनुरोध पर आजमगढ़ पुलिस जांच में सहयोग कर रही है। ...

निजामाबाद के पूर्व विधायक आलम बदी आज़मी का निधन, आजमगढ़ में शोक की लहर

पांच बार रहे विधायक, सादगी और ईमानदार राजनीति के लिए पूरे प्रदेश में थी अलग पहचान

आजमगढ़। निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता आलम बदी आज़मी का बुधवार रात निधन हो गया। वह कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही आजमगढ़ समेत पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और हजारों समर्थकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

आलम बदी आज़मी का जन्म वर्ष 1936 में आजमगढ़ के बिंदवल, जयराजपुर (बिलरियागंज) में हुआ था। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने गोरखपुर में नौकरी की, लेकिन महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस के विचारों से प्रेरित होकर समाजसेवा और राजनीति को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्ष 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर पहली बार निजामाबाद विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद वह कुल पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए जनता के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाने में सफल रहे। साल 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें मंत्री पद की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया कि वह अपने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। उनके इस निर्णय ने उन्हें जननेता के रूप में अलग पहचान दिलाई। आलम बदी आज़मी अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए भी जाने जाते थे। साधारण कुर्ता-पायजामा, पैरों में चप्पल, कान में सुनने की मशीन और हाथ में कीपैड मोबाइल उनकी पहचान थे। वह बिना किसी तामझाम के लोगों से मिलते थे और अक्सर पैदल ही क्षेत्र का भ्रमण कर जनता की समस्याएं सुनते थे। उन्होंने राजनीति को मेशा जनसेवा का माध्यम माना। ईमानदारी, पारदर्शिता और जनता के प्रति समर्पण उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषताएं रहीं। उनके निधन से आजमगढ़ ने एक ऐसे जननेता को खो दिया है, जिनकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की मिसाल लंबे समय तक याद की जाएगी।

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