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खास खबर

हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का खुलासा, महिला समेत तीन गिरफ्तार

बस्ती में तत्कालीन थानाध्यक्ष की आत्महत्या मामले में कार्रवाई अश्लील वीडियो बनाकर वसूली का आरोप आजमगढ़/बस्ती। बस्ती जिले के वाल्टरगंज थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष और आजमगढ़ के भीलमपुर छपरा निवासी सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने कथित हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस ने मामले में एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से बोलेरो और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, सूर्य प्रकाश सिंह ने 29 अगस्त को अपने सरकारी आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद शुरू हुई जांच में पुलिस को हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग से जुड़े कई अहम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिले। पुलिस का आरोप है कि प्रियंका चौधरी नाम की महिला लोगों से संपर्क कर उन्हें अपने जाल में फंसाती थी। इसके बाद अश्लील वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी दी जाती थी और लाखों रुपये की मांग की जाती थी। पुलिस के अनुसार, इस तरीके से कई लोगों से कथित तौर पर रकम वसूली गई। जांच में सूर्य प्रकाश सिंह के प्रियंका चौधरी और उसके साथी विजय प्रकाश के संपर्क ...

निजामाबाद के पूर्व विधायक आलम बदी आज़मी का निधन, आजमगढ़ में शोक की लहर

पांच बार रहे विधायक, सादगी और ईमानदार राजनीति के लिए पूरे प्रदेश में थी अलग पहचान

आजमगढ़। निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता आलम बदी आज़मी का बुधवार रात निधन हो गया। वह कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही आजमगढ़ समेत पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और हजारों समर्थकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

आलम बदी आज़मी का जन्म वर्ष 1936 में आजमगढ़ के बिंदवल, जयराजपुर (बिलरियागंज) में हुआ था। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने गोरखपुर में नौकरी की, लेकिन महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस के विचारों से प्रेरित होकर समाजसेवा और राजनीति को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्ष 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर पहली बार निजामाबाद विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद वह कुल पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए जनता के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाने में सफल रहे। साल 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें मंत्री पद की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया कि वह अपने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। उनके इस निर्णय ने उन्हें जननेता के रूप में अलग पहचान दिलाई। आलम बदी आज़मी अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए भी जाने जाते थे। साधारण कुर्ता-पायजामा, पैरों में चप्पल, कान में सुनने की मशीन और हाथ में कीपैड मोबाइल उनकी पहचान थे। वह बिना किसी तामझाम के लोगों से मिलते थे और अक्सर पैदल ही क्षेत्र का भ्रमण कर जनता की समस्याएं सुनते थे। उन्होंने राजनीति को मेशा जनसेवा का माध्यम माना। ईमानदारी, पारदर्शिता और जनता के प्रति समर्पण उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषताएं रहीं। उनके निधन से आजमगढ़ ने एक ऐसे जननेता को खो दिया है, जिनकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की मिसाल लंबे समय तक याद की जाएगी।

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