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छत के रास्ते घर में घुसे चोर, 16 लाख के जेवर व सवा लाख नकदी ले उड़े

बिलरियागंज के श्रीनगर (सियरहां) गांव में वारदात परिवार सोता रहा, दूसरे घर में भी चोरी की कोशिश नाकाम आजमगढ़। बिलरियागंज थाना क्षेत्र के श्रीनगर (सियरहां) गांव में सोमवार-मंगलवार की रात अज्ञात चोरों ने एक मकान को निशाना बनाते हुए करीब 15 से 16 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और सवा लाख रुपये की नकदी चोरी कर ली। वारदात के समय परिवार के सदस्य घर के अंदर सो रहे थे। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांव निवासी विजय राय का परिवार सोमवार रात भोजन के बाद सो गया था। देर रात चोर छत के रास्ते सीढ़ी से घर में दाखिल हुए और दो-तीन कमरों में रखे बक्सों की कुंडी उखाड़कर उनमें रखे सोने-चांदी के जेवरात तथा करीब सवा लाख रुपये नकद लेकर फरार हो गए। चोरी गए सामान की अनुमानित कीमत 15 से 16 लाख रुपये बताई गई है। मंगलवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे विजय राय की नींद खुली तो घर के दरवाजे खुले और सामान बिखरा मिला। शोर मचाने पर परिवार के अन्य सदस्य और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलने पर डा...

22 जुलाई : भारतीय ध्वज दिवस आज, जानिए तिरंगे का इतिहास, महत्व और ध्वज संहिता के अहम नियम




भारतीय ध्वज दिवस आज, जानिए तिरंगे का इतिहास, महत्व और ध्वज संहिता के अहम नियम

22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में किया था अंगीकार, 15 अगस्त 1947 को पहली बार फहराया गया
आजमगढ़। हर वर्ष 22 जुलाई को भारतीय ध्वज दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के गौरव, एकता और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक तिरंगे को समर्पित है। इसी दिन वर्ष 1947 में संविधान सभा ने तिरंगे को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। इसके बाद 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत में पहली बार तिरंगा फहराया गया।

प्रमुख बातें
● 22 जुलाई क्यों है खास?
22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया।
स्वतंत्रता से 23 दिन पहले राष्ट्रीय ध्वज का चयन किया गया।
15 अगस्त 1947 को पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।
● तिरंगे का इतिहास
आज के स्वरूप तक पहुंचने से पहले राष्ट्रीय ध्वज में कई बदलाव हुए।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अलग-अलग ध्वजों का प्रयोग किया गया।
पहला राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को कोलकाता के पारसी बागान स्क्वायर (ग्रीन पार्क) में फहराया गया था।
● तिरंगे के तीन रंगों का अर्थ
केसरिया: साहस, त्याग और शक्ति का प्रतीक।
सफेद: शांति, सत्य और ईमानदारी का प्रतीक।
हरा: समृद्धि, उर्वरता, विकास और प्रकृति का प्रतीक।
अशोक चक्र: सफेद पट्टी के मध्य स्थित 24 तीलियों वाला धर्म चक्र, जो निरंतर प्रगति और न्याय का संदेश देता है।
● 2002 से पहले नहीं थी सभी को अनुमति
वर्ष 2002 तक आम नागरिक केवल कुछ राष्ट्रीय अवसरों पर ही तिरंगा फहरा सकते थे।
26 जनवरी 2002 से भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन के बाद नागरिकों को किसी भी दिन सम्मानपूर्वक तिरंगा फहराने की अनुमति मिली।
शर्त यह है कि ध्वज संहिता का पूर्ण पालन किया जाए।
● तिरंगा क्यों है विशेष?
राष्ट्रीय एकता, अखंडता और देशभक्ति का प्रतीक।
स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों की याद दिलाता है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है।
तिरंगा फहराते समय रखें इन बातों का ध्यान
ध्वजारोहण के समय सम्मानपूर्वक खड़े रहें।
क्षैतिज रूप में केसरिया रंग सबसे ऊपर रहे।
लंबवत लगाने पर केसरिया पट्टी दाईं ओर हो।
तिरंगे को पूरे सम्मान और गरिमा के साथ फहराएं।
ध्वज उतारते समय उसे धीरे-धीरे और सम्मानपूर्वक नीचे लाएं।
तिरंगे का किसी भी प्रकार से अपमान न हो और ध्वज संहिता का पालन अवश्य करें।
तथ्य एक नजर में
ध्वज दिवस: 22 जुलाई
राष्ट्रीय ध्वज अपनाया गया: 22 जुलाई 1947
पहली बार फहराया गया: 15 अगस्त 1947
पहला राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया: 7 अगस्त 1906, कोलकाता
अशोक चक्र: 24 तीलियों वाला धर्म चक्र
ध्वज संहिता में संशोधन: 26 जनवरी 2002

भारतीय ध्वज केवल एक कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के आत्मसम्मान, स्वतंत्रता, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।

नोट : न्यूज सोशल मीडिया के माध्यम से बनाया गया है।

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