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ऑपरेशन में आठ घंटे की देरी का आरोप, गर्भ में नवजात की मौत

निजी अस्पताल में परिजनों ने किया हंगामा पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा शव आजमगढ़। रानी की सराय थाना क्षेत्र के महमूदपुर गांव के पास लखनऊ-बलिया हाईवे किनारे स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान गर्भस्थ नवजात की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर ऑपरेशन में करीब आठ घंटे की देरी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए मंगलवार रात हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को शांत कराया। पीड़ित की तहरीर पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। रानी की सराय थाना क्षेत्र के सेठवल निवासी राजनारायण जायसवाल ने बताया कि वह पिछले एक साल से अपनी पत्नी शालिनी जायसवाल का इसी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। मंगलवार सुबह करीब सात बजे उन्होंने पत्नी को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। आरोप है कि दोपहर 12 बजे तक अस्पतालकर्मी सामान्य प्रसव होने का आश्वासन देते रहे। इसके बाद करीब 12:30 बजे ऑपरेशन के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए और 10 हजार रुपये जमा कराए गए। परिजनों का आरोप है कि सहमति लेने के करीब आठ घंटे बाद रात पौने नौ बजे ऑपरेशन किया गया। तब तक गर्भ में ही नवजात की मौत हो चुकी थी। इसकी जानक...

रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में नवजात अदला-बदली मामले में FIR, छह पर मुकदमा दर्ज

तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद सिधारी पुलिस ने शुरू की विवेचना

अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही आई सामने

आजमगढ़। सिधारी थाना क्षेत्र स्थित रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में कथित नवजात शिशु अदला-बदली के बहुचर्चित मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के नोडल अधिकारी की तहरीर पर थाना सिधारी में मुकदमा संख्या 311/2026 दर्ज किया गया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) एवं 281 के तहत अस्पताल से जुड़े छह लोगों को नामजद किया गया है।
मामले के अनुसार, कोतवाली क्षेत्र निवासी कमलेश वर्मा की पत्नी नेहा सोनी ने 12 मई 2026 को जिला महिला चिकित्सालय में पुत्र को जन्म दिया था। नवजात की तबीयत बिगड़ने पर उसे उसी दिन उपचार के लिए रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। आरोप है कि 27 मई को छुट्टी के समय परिजनों को उनके पुत्र की जगह नवजात पुत्री सौंप दी गई। विरोध करने पर अस्पताल प्रशासन द्वारा कथित रूप से उन्हें चुप रहने का दबाव बनाया गया।
मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने और शिकायतें बढ़ने के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया। आरोप है कि दूसरे परिवार से संपर्क कर उसी रात नवजात पुत्र को वापस अस्पताल लाया गया और कमलेश वर्मा को उनका पुत्र सौंपा गया। इसके बाद दूसरे परिवार को उनकी पुत्री वापस दी गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी, नगर क्षेत्राधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने 10 जुलाई 2026 को सौंपी गई रिपोर्ट में अस्पताल कर्मियों की लापरवाही को नवजातों की अदला-बदली का कारण बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि बच्चों की पहचान के लिए लगाए गए टैग बदल जाने से यह स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि, जांच में जानबूझकर अदला-बदली किए जाने की पुष्टि नहीं हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर स्टाफ नर्स नीतू यादव, अनुरजित चौहान, जयकृष्ण शुक्ल, शशि कुमार पांडेय, माधवी यादव और कन्हैया यादव के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। सिधारी पुलिस मामले की विवेचना कर रही है और संबंधित दस्तावेजों व साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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