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खास खबर

दिनदहाड़े सूने मकान का ताला तोड़ लाखों के जेवर-नकदी पर हाथ साफ

स्कूल गई थी महिला, लौटने पर टूटा मिला ताला और लॉकर सीसीटीवी में संदिग्ध युवक कैद, पुलिस जांच में जुटी आजमगढ़ । शहर कोतवाली क्षेत्र के आराजीबाग मोहल्ले में दिनदहाड़े चोरों ने सूने मकान को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये के जेवर और नकदी चोरी कर ली। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। आराजीबाग निवासी रीना श्रीवास्तव स्कूल गई थीं। घर पर ताला बंद था। दोपहर करीब दो बजे जब वह वापस लौटीं तो मुख्य दरवाजे का ताला टूटा मिला। घर के भीतर जाने पर अलमारी का लॉकर भी टूटा हुआ था और सामान बिखरा पड़ा था। पीड़िता के अनुसार चोर सोने की चेन, मंगलसूत्र, नथिया, कान के टॉप्स, लॉकेट तथा करीब ₹25 हजार नकद लेकर फरार हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर एक संदिग्ध युवक घर के आसपास आता-जाता दिखाई दिया। पीड़िता का आरोप है कि फुटेज में दिख रहा युवक पहले उनके घर पर सेफ्टी टैंक की सफाई का कार्य कर चुका है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुक...

चमावा में शब्बेदारी: जनाबे सकीना की याद में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

ताबूत और अलम के साथ निकला जुलूस, 'हाय सकीना, हाय प्यास' की सदाओं से गूंजा माहौल


फूलपुर।
तहसील क्षेत्र के चमावा गांव में शनिवार की रात अंजुमन फरो-ग-ए-अजा के तत्वावधान में आयोजित शब्बेदारी में इमाम हुसैन की पुत्री जनाबे सकीना को खिराज-ए-अकीदत पेश करने के लिए बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुटे। कार्यक्रम के दौरान छोटे-छोटे बच्चों ने जनाबे सकीना की याद में ताबूत उठाया, जबकि बच्चियां "हाय सकीना, हाय प्यास" की सदाएं बुलंद करती हुई चल रही थीं। इस भावुक दृश्य ने मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं। 



इससे पूर्व आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना नजफ अब्बास जैदी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने एक चिराग से 72 चिराग जलाए और पूरी इंसानियत को हिदायत का रास्ता दिखाया। उन्होंने कहा कि जब से कायनात है, तब से हुसैन हिदायत के प्रतीक रहे हैं। मौलाना नाफिर खान आज़मी और मौलाना इकरार आज़मी ने भी मजलिस को खिताब करते हुए इमाम हुसैन की कुर्बानी और जनाबे सकीना की अजमत पर प्रकाश डाला। नौहा और मातम की कड़ी में अंजुमन फरो-ग-ए-अजा, मासूमिया डिघिया, लश्करे मेहदी भादी, अलमदारिया खानवाई तथा रौनक-ए-अजा रजिस्टर्ड आलमपुर की अंजुमनों ने प्रभावशाली नौहे पेश किए। देर रात निकाले गए अलम और ताबूत का परिचय (नकाबत) मौलाना तनवीर हैदर रजा आज़मी ने अपने विशेष अंदाज में कराया। कार्यक्रम का संचालन मीसम अब्बास और सागर आज़मी ने संयुक्त रूप से किया। शब्बेदारी में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों ने गम का प्रतीक काले वस्त्र पहनकर शिरकत की। विशेष रूप से महिलाओं की उपस्थिति पुरुषों की अपेक्षा अधिक रही, जिससे पूरा वातावरण गम और अकीदत में डूबा नजर आया।

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