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हाईवे पर मौत का जाल, जिम्मेदार बेखबर

 कहीं ट्रकों की अवैध पार्किंग तो कहीं सड़क पर गहरे गड्ढे, राहगीरों की जान जोखिम में हाइवे पर ट्रकों की पार्किंग और गड्ढे बढ़ा रहे हादसे का खतरा ट्रकों की अवैध पार्किंग और गड्ढों से हाइवे पर हादसों का खतरा एक लेन पर भारी वाहनों का कब्जा, रानी की सराय से कोटिला तक सड़क बदहाल आजमगढ़। जिले के नेशनल और स्टेट हाईवे पर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर भारी वाहनों की पार्किंग हादसों को न्योता दे रही है। हाईवे की पटरियों से लेकर एक लेन तक ट्रक और अन्य वाहन खड़े होने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रात के समय सड़क किनारे खड़े बड़े वाहनों के कारण बाइक, स्कूटी और चार पहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक खतरा रहता है। हादसा होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बढ़ती है, जबकि नियमित कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान कर खानापूर्ति किए जाने का आरोप है। जिले से आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-अयोध्या, आजमगढ़-गोरखपुर, आजमगढ़-बलिया, आजमगढ़ वाया शाहगंज-लखनऊ और आजमगढ़-प्रयागराज मार्ग गुजरते हैं। आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-प्रयागराज और आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग पर मोरंग, बालू, गिट्टी और बोल्डर लदे ...

भैरवधाम के सुंदरीकरण कार्य में मिले दो प्राचीन कुएं, श्रद्धालुओं में बढ़ी उत्सुकता

विकास कार्य के दौरान मिली ऐतिहासिक धरोहर, संरक्षण और पुरातात्विक जांच की उठी मांग

महराजगंज (आजमगढ़)। नगर पंचायत महराजगंज स्थित प्रसिद्ध भैरवधाम में चल रहे सुंदरीकरण एवं विकास कार्य के दौरान दो प्राचीन कुएं मिलने से क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचकर कुओं को देखने लगे।
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भैरवधाम को राजा दक्ष की नगरी माना जाता है। मान्यता है कि यहीं आयोजित यज्ञ में भगवान शिव के अपमान से आहत होकर माता सती ने आत्मदाह किया था। इसके बाद भगवान शिव के क्रोध से भैरवनाथ की उत्पत्ति हुई और यज्ञ का विध्वंस हुआ। स्थानीय परंपरा के अनुसार इस धाम में कभी 365 कुएं और 365 यज्ञ वेदियां थीं। हालांकि, इन मान्यताओं की स्वतंत्र ऐतिहासिक अथवा पुरातात्विक पुष्टि नहीं हुई है। भैरवधाम विकास परियोजना के तहत परिसर का सुंदरीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार का कार्य चल रहा है। इसी दौरान खुदाई में दोनों प्राचीन कुएं सामने आए। सरयू तट स्थित भैरवनाथ धाम के एक शिलालेख में भगवान श्रीराम के वनगमन के दौरान यहां आगमन का उल्लेख होने की भी स्थानीय मान्यता है। सूचना मिलने पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि डॉ. सुनील जायसवाल, वरिष्ठ लिपिक मनोज सिंह तथा निकाय कर्मी मौके पर पहुंचे। नगर पंचायत अध्यक्षा श्वेता जायसवाल ने दोनों कुओं को सुरक्षित रखते हुए उनका जीर्णोद्धार कराने तथा श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थित रूप से विकसित करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय लोगों ने दोनों कुओं की पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक जांच कराने और उन्हें धाम की प्राचीन विरासत के रूप में संरक्षित करने की मांग की है। फिलहाल विकास कार्य के दौरान मिले ये दोनों कुएं श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों के बीच आकर्षण और चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

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