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ललही छठ माता की विधि-विधान से हुई पूजा

  ‘ललना जिए हजार बरिस...’ सोहर से गूंजे आंगन, पुत्र की सलामती को माताओं ने रखा ललही छठ का व्रत तिन्नी के चावल-पुड़ी का लगाया भोग, कुश की जुट्टी स्थापित कर की आराधना ; लोकगीतों में छलकी ममता आजमगढ़। ‘ललना जिए हजार बरिस, माई के एही अरमान...’ जैसे पारंपरिक सोहर और मंगलगीतों से रविवार को जिले के गांव से लेकर शहर तक के आंगन गूंज उठे। पुत्र की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन की कामना को लेकर माताओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ ललही छठ (हल षष्ठी) का व्रत रखा। दिनभर उपवास के बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से ललही छठ माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और पुत्रों के मंगल की कामना की। नगर के अनंतपुरा, गुरूटोला, कोलघाट, लछिरामपुर, पुरानी कोतवाली समेत विभिन्न मोहल्लों में महिलाओं ने समूह बनाकर पूजा की। पूजा स्थल पर महिलाओं ने गोट बनाकर उसमें कुश की जुट्टी स्थापित की और पारंपरिक विधि से ललही छठ माता की आराधना की। तिन्नी के चावल और तिन्नी की पूड़ी का भोग लगाया गया। पूजन के बाद महिलाओं ने प्रसाद ग्रहण किया और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। पूजा के दौरान गूंजे पारंपरिक सोहर ने माहौल को भक्त...

शतचंडी महायज्ञ : आचार्य ने बताया शक्ति उपासना का महत्व

धर्म को मानवता और लोककल्याण से जोड़ने का दिया संदेश

ठेकमा। पसीका स्थित प्राचीन काली मंदिर परिसर में आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ एवं श्रीमद् देवी भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा के दौरान कथावाचक आचार्य राजमणि ने मां भगवती की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शतचंडी महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देने वाला महापर्व है।
उन्होंने कहा कि मां चंडी की आराधना से भय, रोग और संकटों का नाश होता है तथा व्यक्ति में आत्मबल, सद्बुद्धि और धर्म के प्रति आस्था बढ़ती है। श्रद्धालुओं से सत्य, सेवा, संस्कार और सदाचार को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म तभी सार्थक है, जब वह मानवता और लोककल्याण से जुड़ा हो। यज्ञ मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन संपन्न हुआ, जबकि कथा पंडाल में श्रद्धालु भक्ति भाव से कथा श्रवण करते रहे। मंदिर परिसर जयकारों और भजनों से गुंजायमान रहा। आयोजन समिति के अनुसार महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, कथा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।

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