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ललही छठ माता की विधि-विधान से हुई पूजा

  ‘ललना जिए हजार बरिस...’ सोहर से गूंजे आंगन, पुत्र की सलामती को माताओं ने रखा ललही छठ का व्रत तिन्नी के चावल-पुड़ी का लगाया भोग, कुश की जुट्टी स्थापित कर की आराधना ; लोकगीतों में छलकी ममता आजमगढ़। ‘ललना जिए हजार बरिस, माई के एही अरमान...’ जैसे पारंपरिक सोहर और मंगलगीतों से रविवार को जिले के गांव से लेकर शहर तक के आंगन गूंज उठे। पुत्र की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन की कामना को लेकर माताओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ ललही छठ (हल षष्ठी) का व्रत रखा। दिनभर उपवास के बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से ललही छठ माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और पुत्रों के मंगल की कामना की। नगर के अनंतपुरा, गुरूटोला, कोलघाट, लछिरामपुर, पुरानी कोतवाली समेत विभिन्न मोहल्लों में महिलाओं ने समूह बनाकर पूजा की। पूजा स्थल पर महिलाओं ने गोट बनाकर उसमें कुश की जुट्टी स्थापित की और पारंपरिक विधि से ललही छठ माता की आराधना की। तिन्नी के चावल और तिन्नी की पूड़ी का भोग लगाया गया। पूजन के बाद महिलाओं ने प्रसाद ग्रहण किया और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। पूजा के दौरान गूंजे पारंपरिक सोहर ने माहौल को भक्त...

1600 आबादी वाला गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित, न स्कूल बना न पंचायत भवन

सरकारी भवनों के अभाव में दूसरे गांवों पर निर्भर ग्रामीण

किराए के भवन में चल रहा स्वास्थ्य केंद्र

भूमि विवाद बना विकास में बाधा



आजमगढ़ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास और मूलभूत सुविधाएं हर गांव तक पहुंचाने के दावे कर रही है, लेकिन ठेकमा विकासखंड की ग्राम पंचायत रसूलबाज बहादुरपुर आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में विकास की राह देख रही है। करीब 1600 की आबादी वाले इस गांव में आज तक न प्राथमिक विद्यालय का निर्माण हो सका है, न पंचायत भवन, न आंगनबाड़ी केंद्र और न ही स्थायी स्वास्थ्य उपकेंद्र बन पाया है। परिणामस्वरूप ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सुविधाओं के लिए दूसरे गांवों का रुख करना पड़ता है।
ब्लॉक मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव की सड़कें भी बदहाल हैं। बरसात के मौसम में कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है। प्राथमिक विद्यालय न होने से छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए पड़ोसी गांव जाना पड़ता है। वहीं आंगनबाड़ी केंद्र के अभाव में गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। गांव का आरोग्य मंदिर (स्वास्थ्य केंद्र) भी स्थायी भवन के अभाव में किराए के मकान में संचालित हो रहा है। सामान्य इलाज के लिए भी ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर अस्पताल जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार ब्लॉक प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से गांव में सरकारी भवनों के निर्माण की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बेहतर सड़क संपर्क की मांग भी वर्षों से अधूरी पड़ी है।
क्या बोले जिम्मेदार
ग्राम पंचायत अधिकारी ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि सरकारी भूमि उपलब्ध न होने के कारण पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र सहित अन्य सरकारी भवनों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। भूमि उपलब्ध होने पर प्रस्ताव तैयार कर निर्माण कार्य कराने का प्रयास किया जाएगा।
प्रधान प्रशासक राम प्रताप प्रजापति ने कहा कि ग्राम पंचायत में सरकारी भवनों के निर्माण के लिए कई बार ब्लॉक और तहसील प्रशासन से भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक उपयुक्त सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। इसी कारण पंचायत भवन, सचिवालय सहित अन्य भवनों का निर्माण नहीं हो पाया।
ग्रामीणों की पीड़ा
विजय कुमार यादव का कहना है कि गांव में पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध है, इसके बावजूद आज तक प्राथमिक विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत भवन या स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण नहीं कराया गया। प्रशासन सर्वे कराकर जल्द आवश्यक भवनों का निर्माण कराए ताकि ग्रामीणों को अपने ही गांव में सुविधाएं मिल सकें।
राजेंद्र यादव ने कहा कि सरकार गांवों के विकास की बात करती है, लेकिन उनका गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। सरकारी जमीन होने के बावजूद किसी विभाग ने निर्माण की पहल नहीं की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शीघ्र कार्रवाई कर गांव में आवश्यक सरकारी भवनों के निर्माण की मांग की।

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