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खास खबर

हाईवे पर मौत का जाल, जिम्मेदार बेखबर

 कहीं ट्रकों की अवैध पार्किंग तो कहीं सड़क पर गहरे गड्ढे, राहगीरों की जान जोखिम में हाइवे पर ट्रकों की पार्किंग और गड्ढे बढ़ा रहे हादसे का खतरा ट्रकों की अवैध पार्किंग और गड्ढों से हाइवे पर हादसों का खतरा एक लेन पर भारी वाहनों का कब्जा, रानी की सराय से कोटिला तक सड़क बदहाल आजमगढ़। जिले के नेशनल और स्टेट हाईवे पर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर भारी वाहनों की पार्किंग हादसों को न्योता दे रही है। हाईवे की पटरियों से लेकर एक लेन तक ट्रक और अन्य वाहन खड़े होने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रात के समय सड़क किनारे खड़े बड़े वाहनों के कारण बाइक, स्कूटी और चार पहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक खतरा रहता है। हादसा होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बढ़ती है, जबकि नियमित कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान कर खानापूर्ति किए जाने का आरोप है। जिले से आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-अयोध्या, आजमगढ़-गोरखपुर, आजमगढ़-बलिया, आजमगढ़ वाया शाहगंज-लखनऊ और आजमगढ़-प्रयागराज मार्ग गुजरते हैं। आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-प्रयागराज और आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग पर मोरंग, बालू, गिट्टी और बोल्डर लदे ...

Azamgarh: पूर्व विधायक अभयनारायण पटेल को आजीवन कारावास, जुर्माना भी

हत्या के 24 साल पुराने मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा

आजमगढ़। एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट के जज ओम प्रकाश वर्मा तृतीय ने हत्या के 24 साल पुराने मुकदमें में सुनवाई पूरी करने के बाद पूर्व विधायक अभय नारायण पटेल सहित चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न जमा करने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतानी पड़ सकती है। 
अभियोजन कहानी के अनुसार रामनयन सिंह पुत्र रामबहोर सिंह निवासी उर्दिहा नई बस्ती कोलवा थाना रौनापार के भाई संतराज को कोटे की दुकान आवंटित हुई थी। इससे पहले यह कोटा अभय नरायन पटेल को आवंटित थी। इस बात से गांव के अभय नारायण सिंह पुत्र दिलीप सिंह रंजिश रखते थे। इस मामले को लेकर 22 अक्टूबर 1998 की शाम करीब 7 बजे जब संतराज चांदपट्टी से घर आते समय रास्ते में अभय नारायण सिंह पुत्र दिलीप सिंह, लाल बिहारी सिंह तथा लाल बहादुर सिंह पुत्रगण कोदई सिंह, हरेंद्र पुत्र लालू ने संतराज को रोक लिया और संतराज को गोली मार दी। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद अभय नरायन पटेल का नाम निकालते हुए तीन आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित कर दिया। दौरान मुकदमा वादी राम नयन के बयान पर अदालत ने 2001 में अभय नारायण सिंह पटेल को बतौर आरोपी न्यायालय में तलब किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक मिश्रा ने वादी मुकदमा समेत पांच गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी अभय नारायण सिंह पटेल, लाल बहादुर, लाल बिहारी तथा हरेंद्र को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को बीस हजार रूपए अर्थदंड की सजा सुनाई।

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