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नौकरी से निकाला तो डॉक्टर की हत्या की रची साजिश! तीन पर मुकदमा

तरवां के कमहरिया स्थित अस्पताल का मामला बातचीत में साजिश का खुलासा होने का डॉक्टर ने किया दावा आजमगढ़। तरवां थाना क्षेत्र के कमहरिया स्थित एक अस्पताल के संचालक डॉक्टर ने अपने पूर्व कर्मचारियों पर हत्या की साजिश रचने और निगरानी करने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अस्पताल संचालक डॉ. श्यामलाल के यहां हरिओम उर्फ गोलू, सिद्धार्थ और रजजत यादव काम करते थे। कामकाज ठीक नहीं होने के कारण तीनों को नौकरी से हटा दिया गया था। डॉक्टर का आरोप है कि इसके बाद से आरोपी उनसे रंजिश रखने लगे और अस्पताल के आसपास संदिग्ध गतिविधियां करने लगे। डॉक्टर ने दावा किया कि अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में आरोपियों की संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी स्थानीय लोगों को दी। तहरीर के मुताबिक आरोपियों से बातचीत के दौरान हत्या की कथित साजिश से संबंधित बातें सामने आईं, जिन्हें रिकॉर्ड किए जाने का भी डॉक्टर ने उल्लेख किया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी खुद को एक पूर्व सांसद का समर्थक...

कैम्ब्रिज मॉडर्न स्कूल में ‘फ्यूचर रेडी मॉम’ कार्यशाला का समापन

डिजिटल दौर में जिम्मेदार पैरेंटिंग पर जोर, माताओं को किया गया सम्मानित

जहानागंज। नगर पंचायत स्थित कैम्ब्रिज मॉडर्न स्कूल में माताओं को समर्पित पंचदिवसीय कार्यशाला ‘फ्यूचर रेडी मॉम’ का शनिवार को प्रमाण-पत्र वितरण समारोह के साथ भव्य समापन हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल माताओं ने डिजिटल युग में बच्चों की परवरिश, स्मार्ट पैरेंटिंग और तकनीक के सकारात्मक उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्राधिकारी सदर एवं उप पुलिस अधीक्षक आस्था जायसवाल तथा विद्यालय के प्रबंधक राकेश सिंह द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर आस्था जायसवाल ने कहा कि वर्तमान समय पूरी तरह डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हो चुका है, ऐसे में बच्चों की परवरिश के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब बच्चों की पसंद-नापसंद और दिनचर्या पर तकनीक का गहरा प्रभाव है, जिससे अभिभावकों की भूमिका और भी अहम हो गई है। उन्होंने मोबाइल के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चे तकनीकी चीजों को तेजी से सीखते हैं, इसलिए अभिभावक अक्सर उन्हें मोबाइल थमा देते हैं। मोबाइल तात्कालिक समाधान तो दे सकता है, लेकिन बच्चों को आत्मनिर्भर और मानसिक रूप से मजबूत बनाने में बाधा भी बन सकता है। उन्होंने माताओं से बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने और तकनीक के संतुलित उपयोग पर विशेष ध्यान देने की अपील की। विद्यालय के प्रबंधक राकेश सिंह ने भी नैतिक मूल्यों और अच्छे पालन-पोषण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए माता-पिता की जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के अंत में आस्था जायसवाल ने कार्यशाला में भाग लेने वाली सभी माताओं को ‘स्मार्ट मॉम’ प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोज कुमार पाण्डेय ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय परिवार के सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।

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