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खास खबर

आईएनएस ऑटोमोबाइल्स ने लॉन्च किया नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW

मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम आजमगढ़ । इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही आईएनएस ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ग्राहकों के लिए नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW बाजार में उतारा है। कंपनी का दावा है कि यह ई-रिक्शा मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम है, जो चालक और यात्रियों दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  कंपनी के अनुसार, IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW में मजबूत बॉडी, आकर्षक डिजाइन और आरामदायक सीटिंग व्यवस्था दी गई है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक सफर का अनुभव मिलता है। वहीं, चालक के लिए यह वाहन कम रखरखाव लागत और बेहतर कमाई का अवसर प्रदान करता है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि बढ़ती ई-रिक्शा मांग को देखते हुए इस मॉडल को आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता मानकों के साथ विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक भरोसेमंद और लाभदायक विकल्प उपलब्ध कराना है।आईएनएस ऑटोमोबाइल्स का मानना है कि यह नया मॉडल शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं को और अधिक सुगम बनाएगा। लॉन्च के साथ ह...

हीरा पर तीन और शिक्षा पर 18 प्रतिशत टैक्स बर्दाश्त नहीं

पीएम और सीएम को अभिभावक महासंघ ने भेजा ज्ञापन

आजमगढ़। ’’हीरा पर तीन और शिक्षा पर 18 प्रतिशत का टैक्स के विरोध में बुधवार को उत्तर प्रदेश अभिभावक महासंघ ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। महासंघ ने इस संदर्भ में आवश्यक कदम उठाते हुए पढेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया, सर्वशिक्षा अभियान जैसे योजनाओं को साकार करने की मांग की। 


प्रदेश महासचिव गोविन्द दुबे ने कहा कि देश के नागरिकों को साक्षर बनाकर ही हम श्रेष्ठ भारत का निर्माण कर सकते है। संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों में शिक्षा प्रमुखता से शामिल है, इसके बावजूद शिक्षा को 18 प्रतिशत के जीएसटी श्रेणी में शामिल किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है जबकि इसी देश में हीरा, सोना चांदी आदि के खरीद पर मात्र 3 प्रतिशत का जीएसटी कर निर्धारण है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि शिक्षा पर नाम मात्र जीएसटी लगाकर देश के सभी बच्चों को शिक्षित हीरा बनाने के लिए व्यापक कदम उठाया जाए। जिलाध्यक्ष सत्या सिंह परिहार ने कहा कि देश या प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को हीरा ज्वैलरी से भी कम जीएसटी के श्रेणी में शामिल किया जाए, ताकि अभिभावकों के आर्थिक बोझ को कम किया जा सकें। एक साक्षर युवा पढ़-लिखकर निकलेगा तो देश की तस्वीर भी बदलेगा और देश की सरकार को हर रूप में कर (टैक्स) प्रदान करेगा ही करेगा लेकिन सरकार युवाओं और उनके अभिभावकों को बढ़ती शिक्षा के बोझ तले दबाकर श्रेष्ठ भारत के निर्माण में स्वयं ही कोताही बरत रही है जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। अरूण चौरसिया ने कहा कि शिक्षा के फीस, और उसकी सामग्रियों से जुड़े प्रत्येक वस्तुओं पर कम से कम जीएसटी का निर्धारण किया जाए। एक तरफ परिषदीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही। वहीं शिक्षा से जुड़े सामाग्रियों का टैक्स आसमान छू रहा है, जिस पर विचार करते हुए शिक्षा और शिक्षण सामाग्री को सस्ता किया जाए।  ज्ञापन सौंपने के दौरान अरूण चौरसिया, डीएन सिंह, अरूण पाठक, जगपाल चौरसिया, संजय वर्मा, आशा वर्मा आलोक पाठक, भानु प्रताप सिंह, जितेंद्र प्रताप सिंह, धीरज चौरसिया आदि मौजूद रहे। 

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