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ऑपरेशन में आठ घंटे की देरी का आरोप, गर्भ में नवजात की मौत

निजी अस्पताल में परिजनों ने किया हंगामा पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा शव आजमगढ़। रानी की सराय थाना क्षेत्र के महमूदपुर गांव के पास लखनऊ-बलिया हाईवे किनारे स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान गर्भस्थ नवजात की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर ऑपरेशन में करीब आठ घंटे की देरी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए मंगलवार रात हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को शांत कराया। पीड़ित की तहरीर पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। रानी की सराय थाना क्षेत्र के सेठवल निवासी राजनारायण जायसवाल ने बताया कि वह पिछले एक साल से अपनी पत्नी शालिनी जायसवाल का इसी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। मंगलवार सुबह करीब सात बजे उन्होंने पत्नी को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। आरोप है कि दोपहर 12 बजे तक अस्पतालकर्मी सामान्य प्रसव होने का आश्वासन देते रहे। इसके बाद करीब 12:30 बजे ऑपरेशन के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए और 10 हजार रुपये जमा कराए गए। परिजनों का आरोप है कि सहमति लेने के करीब आठ घंटे बाद रात पौने नौ बजे ऑपरेशन किया गया। तब तक गर्भ में ही नवजात की मौत हो चुकी थी। इसकी जानक...

हीरा पर तीन और शिक्षा पर 18 प्रतिशत टैक्स बर्दाश्त नहीं

पीएम और सीएम को अभिभावक महासंघ ने भेजा ज्ञापन

आजमगढ़। ’’हीरा पर तीन और शिक्षा पर 18 प्रतिशत का टैक्स के विरोध में बुधवार को उत्तर प्रदेश अभिभावक महासंघ ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। महासंघ ने इस संदर्भ में आवश्यक कदम उठाते हुए पढेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया, सर्वशिक्षा अभियान जैसे योजनाओं को साकार करने की मांग की। 


प्रदेश महासचिव गोविन्द दुबे ने कहा कि देश के नागरिकों को साक्षर बनाकर ही हम श्रेष्ठ भारत का निर्माण कर सकते है। संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों में शिक्षा प्रमुखता से शामिल है, इसके बावजूद शिक्षा को 18 प्रतिशत के जीएसटी श्रेणी में शामिल किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है जबकि इसी देश में हीरा, सोना चांदी आदि के खरीद पर मात्र 3 प्रतिशत का जीएसटी कर निर्धारण है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि शिक्षा पर नाम मात्र जीएसटी लगाकर देश के सभी बच्चों को शिक्षित हीरा बनाने के लिए व्यापक कदम उठाया जाए। जिलाध्यक्ष सत्या सिंह परिहार ने कहा कि देश या प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को हीरा ज्वैलरी से भी कम जीएसटी के श्रेणी में शामिल किया जाए, ताकि अभिभावकों के आर्थिक बोझ को कम किया जा सकें। एक साक्षर युवा पढ़-लिखकर निकलेगा तो देश की तस्वीर भी बदलेगा और देश की सरकार को हर रूप में कर (टैक्स) प्रदान करेगा ही करेगा लेकिन सरकार युवाओं और उनके अभिभावकों को बढ़ती शिक्षा के बोझ तले दबाकर श्रेष्ठ भारत के निर्माण में स्वयं ही कोताही बरत रही है जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। अरूण चौरसिया ने कहा कि शिक्षा के फीस, और उसकी सामग्रियों से जुड़े प्रत्येक वस्तुओं पर कम से कम जीएसटी का निर्धारण किया जाए। एक तरफ परिषदीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही। वहीं शिक्षा से जुड़े सामाग्रियों का टैक्स आसमान छू रहा है, जिस पर विचार करते हुए शिक्षा और शिक्षण सामाग्री को सस्ता किया जाए।  ज्ञापन सौंपने के दौरान अरूण चौरसिया, डीएन सिंह, अरूण पाठक, जगपाल चौरसिया, संजय वर्मा, आशा वर्मा आलोक पाठक, भानु प्रताप सिंह, जितेंद्र प्रताप सिंह, धीरज चौरसिया आदि मौजूद रहे। 

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