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खास खबर

बाजबहादुर में पैतृक मकान विवाद में दो पक्ष आमने-सामने, दोनों ने दर्ज कराया मुकदमा

मरम्मत और निर्माण कार्य को लेकर हुआ विवाद, पुलिस ने शुरू की जांच आजमगढ़। शहर कोतवाली क्षेत्र के बाजबहादुर मोहल्ले में पैतृक मकान और निर्माण कार्य को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पहले पक्ष के मो. अनस पुत्र अब्दुल कुद्दूस ने आरोप लगाया कि 28 जुलाई को वह अपने पैतृक मकान की मरम्मत करा रहे थे। इसी दौरान पुराने विवाद को लेकर विपक्षी पक्ष के लोग मौके पर पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए निर्माण कार्य रुकवाने लगे। विरोध करने पर कुल्हाड़ी, लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया, जिससे वह और बीच-बचाव करने आए उनके परिजन घायल हो गए। आरोप है कि जाते समय विपक्षियों ने जान से मारने की धमकी भी दी। वहीं दूसरे पक्ष के मो. आमिर पुत्र अब्दुल सलाम ने अपनी तहरीर में कहा कि पैतृक मकान का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद विपक्षी पक्ष जबरन निर्माण कार्य करा रहा था। रोकने पर पहले से टांगी, लोहे की रॉड और ल...

रक्तदान महादान, भारत पैरा मेडिकल कालेज के छात्र-छात्राओं ने किया रक्तदान

ब्लड डोनेट करना पुरी तरह सुरक्षितः डा. बीएन दूबे

बरदह। आईएम की ओर से जौनपुर में गुरूवार को रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान आजमगढ़ के ठेकमा स्थित भारत पैरा मेडिकल कालेज के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रक्तदान कर लोगों से भी महादान करने का आह्वान किया।  
 कार्यक्रम की शुरूआत ब्लड बैंक के वरिष्ठ चिकित्सक डा. बीएन दूबे ने किया। इस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं को ब्लड बैंक के कार्य करने के तरीकों के अलावा रक्तदान के फायदे के बारे में बताया। साथ उन्हें आरबीसी, प्लेटलेट, डब्लूबीसी सहित अन्य जानकारियां दी। कहा कि रक्तदान करने से रक्त पतला होता है, जिससे दिल की सेहत में सुधार होता है। कई रिसर्च में ये बात सामने आई है कि ब्लड डोनेट करने से कैंसर और दूसरी बीमारियों का जोखिम कम होता है। ब्लड डोनेट करने से बॉडी से टॉक्सिन बाहर निकल जाता हैं। इससे डोनर का बोन मैरो नए रेड सेल्स बनाता है। नए रेड सेल्स बनने से बॉडी हेल्दी रहती है। ब्लड डोनेट करना पूरी तरह सुरक्षित है। डोनर जितना ब्लड डोनेट करता है. मानव शरीर में 21 दिनों में फिर से खून बन जाता है। हालांकि 24 से 72 घंटे में खून बन जाता है। इस दौरान भारत पैरा मेडिकल कालेज ठेकमा के डीएमएलटी फाइनल के छात्र-छात्राओं में किशन प्रजापति, लक्की यादव, मनीष, नेहा विश्वकर्मा, दीपा, खुशहाली, मनीषा, साक्षी सहित लगभग 50 से ऊपर छात्र-छात्राओं ने रक्तदान किया। अंत में भारत पैरा मेडिकल के डायरेक्टर डा. एमएन प्रजापति ने कहा कि एक स्वस्थ व्यक्ति जिसकी उम्र 18 से 65 साल के बीच है वो रक्त दान कर सकता है। शरीर 24 घंटों में डोनेट किए गए ब्लड की पूर्ति कर लेता है। ब्लड डोनेट करने के 35 से 40 दिनों के बाद खून नए सिरे से बनने लगता है। उन्होंने कहा कि आगे भी हमारा कालेज इस तरह के आयोजन करता रहेगा।

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