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खास खबर

आईएनएस ऑटोमोबाइल्स ने लॉन्च किया नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW

मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम आजमगढ़ । इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही आईएनएस ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ग्राहकों के लिए नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW बाजार में उतारा है। कंपनी का दावा है कि यह ई-रिक्शा मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम है, जो चालक और यात्रियों दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  कंपनी के अनुसार, IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW में मजबूत बॉडी, आकर्षक डिजाइन और आरामदायक सीटिंग व्यवस्था दी गई है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक सफर का अनुभव मिलता है। वहीं, चालक के लिए यह वाहन कम रखरखाव लागत और बेहतर कमाई का अवसर प्रदान करता है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि बढ़ती ई-रिक्शा मांग को देखते हुए इस मॉडल को आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता मानकों के साथ विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक भरोसेमंद और लाभदायक विकल्प उपलब्ध कराना है।आईएनएस ऑटोमोबाइल्स का मानना है कि यह नया मॉडल शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं को और अधिक सुगम बनाएगा। लॉन्च के साथ ह...

बीकापुर की प्रतिमा स्वदेशी सामान से बना रही राखियां

प्रतिमा बोली यह राखियां चीन की बनी राखियों को देगी टक्कर

साहूकार से कर्ज ले शुरू किया राखी बनाना, कईयों को दे रही रोजगार

ठेकमा (पूर्वांचल संवाद)। भाई-बहन का अटूट पर्व रक्षाबंधन में कुछ ही दिन शेष है। इस बार क्षेत्र के भाइयों की कलाई पर विदेशी नहीं स्वदेशी राखियां बंधेगी। ब्लाक के बीकापुर गांव की एक महिला प्रतिमा समूह से कोई मदद न मिलने पर साहूकार से कर्ज लेकर स्वदेशी सामान से खुद राखी बना रही हैं। इनकी बनाई राखियों की डीमांड भी है। साथ ही उनके इस प्रयास से गांव की अन्य कई महिलाओं को भी रोजगार मिला है।  
  बताते चलें कि ठेकमा ब्लाक के बीकापुर गांव की प्रतिमा हनुमान स्वयं सहायता समूह की सचिव हैं। प्रतिमा ने आजीविका मिशन से ट्रेनिंग ली है। इसके बाद वह तरह-तरह के काम किए। लेकिन समूह से कोई मदद न मिलने और रूपयों की कमी के कारण वह कुछ खास नहीं कर सकी। बाद में उन्होंने एक साहूकार से ब्याज पर कर्ज लेकर समूह की महिलाओं के साथ मिलकर स्वदेशी सामान से राखियां बनाना शुरू किया। प्रतिमा ने बताया कि  समूह द्वारा हम लोगों को जब कोई सुविधा नहीं मिली तो कर्ज लेकर स्वदेशी सामान से राखियां बनाना शुरू किए। हमारे साथ गांव की कई और महिलाएं भी जुडी हैं और राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों को गांव से बाजार में बेच रहे हैं। इन राखियों से जो कमाई होगी पहले कर्ज चुकता करेंगे, फिर दूसरा काम करेंगे। उन्होंने बताया कि यह राखियां चीन की राखियों को ही नहीं बल्कि उसके कम दाम को भी टक्कर दे रही है। घरों में राखियां पारंपरिक व आसानी से मिलने वाले उत्पादों व वेस्ट वस्तुओं से तैयार की जा रही है। ऐसे तो कई सालों से राखी घर में बना रही हूं। कुछ अलग करने की सोची, इसलिए स्वेदशी राखियां तैयार किया है।  मोती, रेशम के धागे और स्वदेशी उत्पाद से राखियों को तैयार किया जा रहा है। लोग इन राखियों को पसंद कर रहे हैं।

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