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खास खबर

पूजा के बीच पिस्टल से चली गोलियां, पत्नी समेत तीन की मौत

आधार कार्ड मांगने पर पंडितों से हुआ विवाद फायरिंग के बाद बच्चों के साथ घर में बंद हुआ आरोपी आजमगढ़। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार शाम पूजा के दौरान उस समय सनसनी फैल गई, जब आधार कार्ड मांगने को लेकर हुए विवाद में पिस्टल से फायरिंग कर दी गई। गोली लगने से घर की महिला बबीता सिंह (40) और पूजा कराने आए दो पंडितों महेंद्र पाठक (42) व अखिलेश मिश्रा (55) की मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी अरविंद सिंह अपने तीन बच्चों के साथ घर के अंदर ही बंद हो गया। पुलिस ने मकान को घेरकर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की कवायद शुरू कर दी। बताया गया कि अरविंद सिंह के घर में मंगलवार शाम पूजा का आयोजन चल रहा था। इसमें पटखौली गांव निवासी पंडित महेंद्र पाठक, छितौना भटौली गांव निवासी अखिलेश मिश्रा, उनके पुत्र हिमांशु मिश्रा और एक अन्य पंडित शामिल थे। घर में अरविंद की पत्नी बबीता, मां समला देवी (70) और तीन बच्चे भी मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, शाम करीब छह बजे अरविंद बाजार से घर पहुंचा। पूजा होते देख उसने पंडितों से जानकारी ली और इसके बाद आधार कार्ड मांगने लगा। इसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। व...

विधायक रमाकांत समेत दो अन्य को अदालत ने किया बरी

2004 में सपा समर्थक ने दर्ज कराया था मुकदमा

आजमगढ़। मारपीट व जाति सूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किए जाने के आरोप में फूलपुर- पवई के विधायक रमाकांत यादव समेत दो अन्य को अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया। यह आदेश सोमवार को एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ओमप्रकाश वर्मा की अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद दिया है।
इस मामले में 26 अप्रैल 2004 को इस मुकदमें के वादी व सपा समर्थक पार्टी एजेंट फौजदार पासवान ने सरायमीर थाने में फूलपुर-पवई के विधायक रमाकांत यादव, जिला मऊ के मधुबन निवासी लालबहादुर सिंह व बरदह थाना के केदलीपुर गांव निवासी धनश्यान यादव के विरूद्घ मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमें में आरोप है कि घटना के दिन आरोपियों ने इस मुकदमें के वादी को जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग करते हुए मारापीटा। इस मामले में पुलिस ने विधायक समेत दो अन्य आरोपी के विरूद्घ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। मुकदमें में गवाही की कार्रवाई पूरी होने और अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्को को सुनने के बाद अदालत ने विधायक समेत दो अन्य को बाइज्जत बरी कर दिया। इस मामले में बचाव पक्ष की तरफ से दीवानी न्यायालय के ‌वरिष्ठ अधिवक्ता आद्याशंकर दूबे ने पैरवी की थी।

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