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खास खबर

आईएनएस ऑटोमोबाइल्स ने लॉन्च किया नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW

मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम आजमगढ़ । इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही आईएनएस ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ग्राहकों के लिए नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW बाजार में उतारा है। कंपनी का दावा है कि यह ई-रिक्शा मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम है, जो चालक और यात्रियों दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  कंपनी के अनुसार, IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW में मजबूत बॉडी, आकर्षक डिजाइन और आरामदायक सीटिंग व्यवस्था दी गई है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक सफर का अनुभव मिलता है। वहीं, चालक के लिए यह वाहन कम रखरखाव लागत और बेहतर कमाई का अवसर प्रदान करता है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि बढ़ती ई-रिक्शा मांग को देखते हुए इस मॉडल को आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता मानकों के साथ विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक भरोसेमंद और लाभदायक विकल्प उपलब्ध कराना है।आईएनएस ऑटोमोबाइल्स का मानना है कि यह नया मॉडल शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं को और अधिक सुगम बनाएगा। लॉन्च के साथ ह...

महिलाओं ने आंवला की पूजा कर सुख समृद्धि की मांगी मन्नत

परिवार और रिश्तेदारों संग किया भोजन

आजमगढ़। बुधवार को अक्षय नवमी पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। महिलाओं ने आंवले की पूजा अर्चना कर परिवार के आरोग्य व सुख समृद्धि की मनोतियां मांगी। निर्धनों को अन्न, धन आदि का दान दिया गया। मंदिरों में भी धार्मिक आयोजन संपन्न कराए गए। जिनमें बड़ी संख्या में भक्तों ने सहभागिता की।

 पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा गया। घरों में सुबह से पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गईं। पूजा-अर्चना के लिए लोगों ने अपने घरों पर आंवला की डंडी की व्यवस्था की। इसके साथ ही पूजा के लिए तरह-तरह की वस्तुओं को मंगाया गया। महिलाओं ने आंवला की पूजा करने के बाद परिक्रमा लगाई। साथ ही परिवार सुख -समृद्धि की कामना की।  मान्यता है कि इस दिन किया गया तप, जप, दान इत्यादि कभी अक्षय नहीं होता। व्यक्ति को सभी पापों से मुक्त कर मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु एवं शिवजी का निवास होता है। इस दिन इस वृक्ष के नीचे बैठने और भोजन करने से रोगों का नाश होता है।  पर्व को देखते हुए फूल कारोबारी भी सक्रिय नजर आए। उनके द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर आंवला की डंडी को तोड़कर लाया गया। ताकि इनकी बिक्री की जा सके। 10 रुपये की एक डंडी की बिक्री हुई। वहीं जिन डंडी पर आंवला फल लगे हुए थे, उनको 20 रुपये तक में बिक्री किया गया। मंदिरों में भी पर्व को लेकर व्यवस्था की गई। पुजारियों ने आंवले की डंडी को मंगाकर गमले में लगा दिया ताकि महिलाएं इसकी परिक्रमा कर सकें।

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