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हाईवे पर मौत का जाल, जिम्मेदार बेखबर

 कहीं ट्रकों की अवैध पार्किंग तो कहीं सड़क पर गहरे गड्ढे, राहगीरों की जान जोखिम में हाइवे पर ट्रकों की पार्किंग और गड्ढे बढ़ा रहे हादसे का खतरा ट्रकों की अवैध पार्किंग और गड्ढों से हाइवे पर हादसों का खतरा एक लेन पर भारी वाहनों का कब्जा, रानी की सराय से कोटिला तक सड़क बदहाल आजमगढ़। जिले के नेशनल और स्टेट हाईवे पर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर भारी वाहनों की पार्किंग हादसों को न्योता दे रही है। हाईवे की पटरियों से लेकर एक लेन तक ट्रक और अन्य वाहन खड़े होने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रात के समय सड़क किनारे खड़े बड़े वाहनों के कारण बाइक, स्कूटी और चार पहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक खतरा रहता है। हादसा होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बढ़ती है, जबकि नियमित कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान कर खानापूर्ति किए जाने का आरोप है। जिले से आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-अयोध्या, आजमगढ़-गोरखपुर, आजमगढ़-बलिया, आजमगढ़ वाया शाहगंज-लखनऊ और आजमगढ़-प्रयागराज मार्ग गुजरते हैं। आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-प्रयागराज और आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग पर मोरंग, बालू, गिट्टी और बोल्डर लदे ...

21 दिन की बच्ची के पेट से निकले आठ अविकसित भ्रूण, डाक्टर सहित परिजनों के उड़े होश

नवजात में अविकसित भ्रूण

झारखंड। राजधानी रांची के रानी चिल्ड्रेन अस्पताल में रामगढ़ जिले के एक दंपत्ती की 21 दिन की बेटी के पेट से डाक्टरों ने आठ अविकसित भ्रूण निकाला। जिसके बाद डाक्टर से लेकर परिजन के होश उड़ गए।

जानकारी के अनुसार  झारखंड के रामगढ़ जिले के एक दंपत्ती की 21 दिन की बेटी के पेट से आठ अविकसित भ्रूण निकाला गया। बच्ची के पेट में दर्द होने के बाद उसे आयुष्मान योजना के तहत राजधानी रांची के रानी चिल्ड्रेन अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डाक्टरों ने पेट में ट्यूमर होने की बात कही। इसके बाद बच्ची के ट्यूमर से जब आठ अविकसित भ्रूण निकले तो सभी के होश उड़ गए।

 अस्पताल के निदेशक डा राजेश ने बताया कि अभी तक दुनिया में 10 से भी कम ऐसे मामले सुनने को मिले हैं। यह अपने आप में एक अलग तरह की बीमारी है जिसे फिटस इन फेटु कहा जाता है। इस तरह की बीमारी होने के कोई ठोस कारण का पता नहीं चल पाया है। मालूम हो कि बच्ची का जन्म 10 अक्टूबर को हुआ था। सीटी स्कैन के बाद डाक्टरों को लगा कि उसके पेट में ट्यूमर है। इलाज के लिए बच्ची को रांची स्थित रानी अस्पताल में भर्ती कराया गया। आयुष्मान भारत योजना के तहत उसका आपरेशन किया गया। इस दौरान नवजात के पेट से आठ भ्रूण निकाला गया। नवजात के पेट से जिस तरह से आठ अविकसित भ्रूण निकला है उसके बाद यह शोध का विषय बन चुका है। डाक्टरों ने बताया कि अभी तक दुनिया में इस पर शोध के कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। मेडिकल साइंस में भी इस बीमारी का जिक्र जरूर है लेकिन इसके कारणों पर कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी गई है। यह कई कारणों से हो सकता है, बच्चा जब भ्रूण बनता है उस वक्त भी कुछ गड़बड़ियों की वजह से इस तरह की परेशानी हो सकती है। पीडियाट्रिक सर्जन डा. इमरान ने कहा कि ट्यूमर की शिकायत लेकर नवजात के परिजन रानी अस्पताल आए थे। नवजात को अपनी निगरानी में रखकर 21 दिन बाद आपरेशन किया गया। उन्होंने कहा कि आगे हमलोग इस पर शोध करेंगे। इस सर्जरी में करीब पांच घंटे का समय लगा। सर्जरी में तीन डाक्टरों की टीम शामिल थी, इसमें डा मो इमरान, डा विकास गुप्ता और डा उदय थे। यह सर्जरी मेडिकल छात्र-छात्राओं के लिए भी एक पढ़ाई का हिस्सा है। फिलहाल बच्चे की सेहत में सुधार है और उसके माता-पिता काफी खुश हैं।

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