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यूपी चुनाव की तैयारी: भाजपा में पहले 14 जिलाध्यक्ष होंगे नियुक्त, फिर संगठन में बड़ा फेरबदल

नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने संगठनात्मक संतुलन सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी।  लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा ने संगठन को और मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी इस महीने के अंत तक शेष बचे 14 जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति करने जा रही है। इसके बाद प्रदेश और क्षेत्रीय स्तर पर संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू होगी। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी संगठन के तहत गठित 98 जिलों में लंबित पड़ी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को पूरा करना है। सूत्रों के अनुसार, पहले इन 14 जिलों में नियुक्तियां पूरी की जाएंगी, इसके बाद अगले महीने से प्रदेश स्तरीय संगठन में बदलाव को लेकर मंथन शुरू होगा। गौरतलब है कि प्रदेश संगठन के चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडे द्वारा दो चरणों में 84 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की जा चुकी है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के बीच खींचतान और आपसी सहमति न बनने के कारण 14 जिलों में यह प्रक्रिया अधूरी रह गई थी। इनमें प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है। सूत्रों के मु...

मानसिक स्वास्थ्य मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक

नेहरू हाल में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम

आजमगढ़। जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा दस अक्टूबर से ही विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसी क्रम में शुक्रवार को नेहरू हाल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सीएमओ डॉ. इंद्र नारायण तिवारी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। इसलिए परामर्श व इलाज बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बहुत सी अवधारणाएं ऐसी हैं, जिसमें कुछ मानसिक मरीज चिकित्सक के पास जाता है, कुछ में स्वयं को वह सामान्य मानता है। जबकि उसे परामर्श एवं इलाज की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि मरीजों को पूरी सतर्कता बरतनी पड़ती है। डॉ. तिवारी ने कहा कि कुछ मानसिक रोग ऐसे भी होते हैं, जिसे मरीज का परिवार नहीं मानता है तथा कुछ में समाज के लोग उसे मानसिक रोगी नहीं स्वीकार करते हैं, लेकिन ऐसे मरीजों को काउंसिल एवं दवा की जरूरत होती है। सीएमओ ने कहा कि मानसिक रोगियों के विभिन्न लक्षण पाए जाते हैं, जिसमें निराश या दुखी महसूस करना, अक्सर रोना, मिलने-जुलने में आनंद नहीं आना, थकान महसूस करना, आत्महत्या के विचार आना, नींद ठीक तरह से नहीं आना, मन नहीं लगना, प्रायः दर्द, थकान, सर दर्द महसूस करना आदि हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों को तत्काल पारिवारिक चिकित्सक, जिला मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ से संपर्क करें। यदि संकटकालीन हो तो एंबुलेंस बुलायें या निकट के चिकित्सालय को ले जाएं। इस अवसर पर उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय, डॉ. नितिन यादव मनोवैज्ञानिक चिकित्सक, दिलीप मौर्य आदि उपस्थित रहे।

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