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खास खबर

खेत में दौड़ता करंट बना काल, सरिता की मौत

धान की निराई करते समय विद्युत तार की चपेट में आईं महिला बरदह। थाना क्षेत्र के अहिरौली छतरपुर गांव के घाटमपुर पुरवा में रविवार को खेत में धान की फसल की निराई कर रही 52 वर्षीय महिला विद्युत करंट की चपेट में आ गई। गंभीर रूप से झुलसने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। गांव निवासी सरिता देवी (52) पत्नी अवधनारायण रविवार को दिन में घर से करीब चार मीटर दूर स्थित खेत में धान की फसल की निराई कर रही थीं। इसी दौरान खेत से होकर गुजर रहे विद्युत तार के संपर्क में आने से वह करंट की चपेट में आ गईं। हादसे में गंभीर रूप से झुलसकर वह खेत में ही गिर पड़ीं और उनकी मौत हो गई। बताया गया कि उनके जेठ शहाबुद्दीन राजभर खेत से होकर घर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने सरिता देवी को खेत में पड़ा देखा। उन्होंने तत्काल ग्रामीणों और परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीणों ने बरदह थाना पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे के बाद मृतका के परिवार में मातम पसरा हुआ है।...

Azamgarh: श्रीमद् भागवत कथा के लिए निकाली गई कलश यात्रा

सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ शुरू

आजमगढ़। रविवार को नगर के बिन्नानी गार्डेन में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का शुभारंभ हुआ।  इस क्रम में आसिफगंज स्थित श्रीअग्रवाल धर्मशाला से नगर में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा नगर के मुख्य चौक, मातबरगंज, बड़ादेव होते हुए बिन्नानी गार्डेन पहुंची। जहां विधि विधान से कलशों की स्थापना हुई। लाल जगरनाथ प्रसाद मुकुंदलाल अग्रवाल चैरेटेबुल के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन  कथा वाचक डा. श्याम सुंदर पराशर ने गोकर्ण महाराज की कथा का वर्णन किया। कहा कि धुंधकारी नाम का एक अत्यंत दुराचारी व्यक्ति था। जिसने अपने माता की हत्या की तथा एक वेश्या के संपर्क में आ गया। कालांतर में उस वेश्या ने धुंधकारी की हत्या करके घर के कुएं में डाल दिया। तब धुंधकारी अत्यंत भयंकर प्रेत योनि में पड़ गया। गोकर्ण जी जब पढ़कर आए तो रात में विश्राम के अवसर पर भयंकर-भयंकर आवाजें आने लगी। गोकर्ण जी द्वारा पूछने पर धुंधकारी ने बताया कि भैया में प्रेत योनि में जन्म लेकर पड़ा हूं। तब गोकर्ण महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया। जिसे सुनकर धुंधकारी को प्रेतयोनि से मुक्ति मिली। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में भागवत कथा सुनने का बड़ा ही महत्व है। इससे सुनने से सारे पितरों का उद्घार हो जाता है।

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