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यूपी चुनाव की तैयारी: भाजपा में पहले 14 जिलाध्यक्ष होंगे नियुक्त, फिर संगठन में बड़ा फेरबदल

नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने संगठनात्मक संतुलन सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी।  लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा ने संगठन को और मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी इस महीने के अंत तक शेष बचे 14 जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति करने जा रही है। इसके बाद प्रदेश और क्षेत्रीय स्तर पर संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू होगी। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी संगठन के तहत गठित 98 जिलों में लंबित पड़ी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को पूरा करना है। सूत्रों के अनुसार, पहले इन 14 जिलों में नियुक्तियां पूरी की जाएंगी, इसके बाद अगले महीने से प्रदेश स्तरीय संगठन में बदलाव को लेकर मंथन शुरू होगा। गौरतलब है कि प्रदेश संगठन के चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडे द्वारा दो चरणों में 84 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की जा चुकी है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के बीच खींचतान और आपसी सहमति न बनने के कारण 14 जिलों में यह प्रक्रिया अधूरी रह गई थी। इनमें प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है। सूत्रों के मु...

Azamgarh: लापरवाह निजी डाक्टर ने छीन ली बच्चे की आंख, न्याय के लिए भटक रहा गरीब

 

आजमगढ। जिले के बिलरियागंज में एक निजी चिकित्सक की लापवाही सामने आई है। चिकित्सक द्वारा दी गई आंख की दवा का प्रयोग करते ही बच्चे की दिक्कत बढ़ गई। परिवार के लोग जब दोबारा चिकित्सक के पास गए तो उसने गंभीरता से नहीं लिया जिसके कारण बच्चे के आंख की रोशनी चली गई। परिवार के लोगों ने बच्चे को जिला अस्पातल में दिखाया तो उन्होंने रोशनी लौटने की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया। बच्चे के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे परिवार के लोगों ने चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।  कंधरापुर थाना क्षेत्र के कोहड़ी बुजुर्ग गांव निवासी मनोज का आरोप है कि उसके आठ वर्षीय पुत्र सौरभ की आंख में कुछ दिक्कत थी। वह उसे दिखाने के लिए आई हास्पिटल एवं दांत अस्पताल बिलरियागंज ले गया। वहां अस्पताल के चिकित्सक डा. आलम द्वारा कुछ ड्राप व खाने की दवाएं दी गई। घर पर जैसे ही बच्चे की आंख में दवा डाली गई वह दर्द से कराहने लगा। इसके बाद मनोज पुनः अपने बच्चे को लेकर डाक्टर आलम के पास गए और परेशानी बताई तो उन्होने कुछ दवाओं को बदल दिया। इसके बाद वे बच्चे को घर लेकर चले आए। दोबारा जैसे बच्चे की आंख में दवा डाली गई उसकी आखं से सफेद तरल पदार्थ निकलने लगा। साथ ही बच्चे को अहसनीय पीड़ा शुरू हो गई। इसके बाद वे फिर बच्चे को लेकर डा. आलम के पास पहुंचे तो उन्होने कुछ भी नहीं बतया। बस कहा कि ठीक हो जाएगा। इसके बाद उसे जिला अस्पताल में चिकित्सकों केा दिखाया गया। जिला अस्पातल के चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे की आंख पूरी तरह खराब हो चुकी है। अब वह कभी नहीं देख पाएगा। बच्चे को पत्थर की आंख लगवाने की सलाह देते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। पीडित मनोज का आरोप है कि डा. आलम की घोर लापरवही के कारण उनके बच्चे का जीवन बर्बाद हो गया। अब वह कभी नहीं देख पाएगा। ऐसे में आई हास्पिटल एवं दांत अस्पताल के चिकित्सक कार्रवाई होनी चाहिए। ताकि वह फिर किसी का जीवन न बर्बाद कर सके। पीड़ित ने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

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