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हनुमान जी की प्रतिमा क्षतिग्रस्त, नई स्थापित

पुलिस ने शुरू की जांच, एसडीएम भी पहुंचे मौके पर आजमगढ़। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के पासीपुर रसूलपुर गांव में बृहस्पतिवार की सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में हनुमान जी की प्रतिमा क्षतिग्रस्त मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू कर दी। बाद में नई प्रतिमा स्थापित कराई गई। पासीपुर रसूलपुर गांव स्थित शारदा सहायक शाखा खंड-32 के किनारे, राष्ट्रीय राजमार्ग से लगभग 50 मीटर दक्षिण मठ गोविंद मार्ग पर स्थित हनुमान मंदिर में गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे ग्रामीणों ने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त देखा। घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अनुराग कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रशासन की ओर से नई हनुमान प्रतिमा स्थापित कराकर पूजा-अर्चना भी कराई गई। मौके पर बूढ़नपुर के एसडीएम अभय राज शुक्ल भी पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। थाना प्रभारी अनुराग कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया किसी अराजक तत्व द्वारा माहौल बिगाड़ने जैसी बात सामने नहीं आई है। प्रतिमा किन परिस्थितियों में क्षतिग्रस्त हुई, इसकी जांच की जा रही है। सभी पहलुओं ...

Lucknow: राजफाश होने के बाद पशुपालन विभाग में घटिया दवाओं के वापसी के आदेश

विभागीय तबादलों में भी खेल

लखनऊ। पशुपालन विभाग में घटिया दवाओं का राजफाश होने के बाद निदेशक रोग नियंत्रण का उनका उपयोग न करने और दवाओं को वापस लौटाने का निर्देश है। इससे अब पशुओं का इलाज कैसे किया जाए, डाक्टरों के समक्ष ये समस्या है। वहीं, ऐसे अस्पतालों को विभाग ने आइस लाइनर रेफ्रिजरेटर भेजे हैं, जहां बिजली का कनेक्शन नहीं है। अन्य सामग्री की गुणवत्ता भी बेहद खराब है।

 जिलों में संचालित छह हजार से अधिक गोआश्रय स्थलों में नौ लाख से अधिक गोवंशीयों को रखा गया है। उनके इलाज का जिम्मा पशु चिकित्साधिकारियों पर रहा, पांच साल में करीब दो दर्जन से अधिक डाक्टरों पर इलाज में लापरवाही के आरोप में कार्रवाई हुई। राजकीय विश्लेषक उत्तर प्रदेश ने अप्रैल में पशुओं की कई दवाओं को घटिया करार दिया। उसके बाद से डाक्टर नाराज हैं।  उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ लखनऊ के अध्यक्ष डा. राकेश कुमार का कहना है कि पशुओं की मौत घटिया दवाओं से हुई थी। ऐसे में चिकित्सकों पर हुई कार्रवाई की भरपाई कौन करेगा। रोग नियंत्रण विभाग में जिन दो अफसरों पर घटिया दवा और गुणवत्ताहीन महंगे दामों पर सामग्री खरीदने का आरोप है वे दोनों अहम पदों पर जमे हैं। एक सेवानिवृत्त होकर महत्वपूर्ण पद संभाल रहा है और दूसरा पशुपालन में ही निदेशक पशुपालन है। उसके विरुद्ध लोकायुक्त जांच भी 2019 में शुरू हुई लेकिन उसे दबा दिया गया। तत्कालीन प्रमुख सचिव पशुपालन बीएल मीणा ने इस संबंध में लोकायुक्त को पत्र भी लिखा था लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। मुख्यमंत्री ने दवा व सामग्री खरीद के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त व अपर मुख्य सचिव कृषि को जांच सौंपी गई है। उसकी रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। विभागीय तबादलों में भी खेल: पशुपालन विभाग ने विभागीय तबादलों में भी जमकर खेल किया। 29 जून तक आनलाइन आवेदन लिए गए और 30 जून को आफलाइन आदेश जारी किए गए, उनमें भी कई चिकित्सकों के आदेश उसी तारीख में संशोधित कर दिए गए। इसकी शिकायतें हुईं लेकिन स्वास्थ्य व लोकनिर्माण विभाग की ही जांच हो रही है। पशुपालन सहित अन्य कई विभागों ने आफलाइन आदेश किए उनकी जांच तक नहीं हुई।



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