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खास खबर

आईएनएस ऑटोमोबाइल्स ने लॉन्च किया नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW

मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम आजमगढ़ । इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही आईएनएस ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ग्राहकों के लिए नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW बाजार में उतारा है। कंपनी का दावा है कि यह ई-रिक्शा मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम है, जो चालक और यात्रियों दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  कंपनी के अनुसार, IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW में मजबूत बॉडी, आकर्षक डिजाइन और आरामदायक सीटिंग व्यवस्था दी गई है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक सफर का अनुभव मिलता है। वहीं, चालक के लिए यह वाहन कम रखरखाव लागत और बेहतर कमाई का अवसर प्रदान करता है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि बढ़ती ई-रिक्शा मांग को देखते हुए इस मॉडल को आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता मानकों के साथ विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक भरोसेमंद और लाभदायक विकल्प उपलब्ध कराना है।आईएनएस ऑटोमोबाइल्स का मानना है कि यह नया मॉडल शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं को और अधिक सुगम बनाएगा। लॉन्च के साथ ह...

Azangarh: इस्लामिक वर्ष का पहला महीना मुहर्रमा में 31 से होगा शुरू

शिया आबादी वाले इलाकों में सजे अजाखाने

फूलपुर। इस्लामिक वर्ष का पहला महीना मुहर्रम 31 अगस्त से शुरू होगा। इसे लेकर शिया आबादी वाले इलाकों में अज़ाखाने सज गए हैं। मजलिसों के लिए इमामबाड़ो की साफ- सफाई और रंग रोगन का का कार्य पूरा कर लिया गया है। इमाम चौक पर ताजिया रखने के लिए ताजिया बनाने का सिलसिला शुरू हो गया है।

 मुहर्रम का चांद दिखते ही शिया हज़रात अब गम का प्रतीक कला लिबास में दिखेंगे। मजलिसों और जुलूसों का क्रम दो माह आठ दिन तक चलता है। मुहर्रम का चांद दिखाई देने पर लोगों का दिल दुखी और आंखें नम हो जाती है और घरों पर काले झंडे लग जाते है। मौलाना शकील फ़राज़ कहते है कि करबला में पैगम्बर हज़रत मुहम्मद के नवासे हज़रत इमाम हुसैन अहिंसा के देवता थे।उन्होने अमन और मुहब्बत का पैगाम देने वाले इस्लाम के लिए एक ज़ालिम बादशाह के आगे अपना सिर झुकाने के बजाय तीन दिनों तक भूखे और प्यासे रहकर अपने उजड़े परिवार और सिर्फ बहत्तर सिपाहियों की फौज के साथ उस यज़ीद बादशाह की बत्तीस हज़ार की फौज से जंग करते हुए अपनी कुरबानी दे दी। मुहर्रम महीना शुरू होते ही शिया समुदाय के लोग अज़ाखाने सज़ा देते है। लेकिन उसमें रंगीन झाड़ियों का प्रयोग नही किया जाता है। बल्कि उसे काली चादरों से सजाया जाता है। और करबला में शहीद हुये इमाम को दुखी मन से याद करते है। पहली मुहर्रम से सोग शुरू हो जाता है और यह सिलसिला आठ रबीअव्वल तक चलता है। नौ मुहर्रम तक दिन रात मजलिसे होती है । दस मुहर्रम को ताजिया दफन किया जाता है। इसके बाद रबीअव्वल की आठ तारीख तक जुलुसो और अमारियाँ निकालने का क्रम चलता है। शनिवार को मोहर्रम का चांद नमूदार होने पर मेजवां गांव स्थिति इमाम बारगाह में मजलिसे शुरू की गई।

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