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हाईवे पर मौत का जाल, जिम्मेदार बेखबर

 कहीं ट्रकों की अवैध पार्किंग तो कहीं सड़क पर गहरे गड्ढे, राहगीरों की जान जोखिम में हाइवे पर ट्रकों की पार्किंग और गड्ढे बढ़ा रहे हादसे का खतरा ट्रकों की अवैध पार्किंग और गड्ढों से हाइवे पर हादसों का खतरा एक लेन पर भारी वाहनों का कब्जा, रानी की सराय से कोटिला तक सड़क बदहाल आजमगढ़। जिले के नेशनल और स्टेट हाईवे पर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर भारी वाहनों की पार्किंग हादसों को न्योता दे रही है। हाईवे की पटरियों से लेकर एक लेन तक ट्रक और अन्य वाहन खड़े होने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रात के समय सड़क किनारे खड़े बड़े वाहनों के कारण बाइक, स्कूटी और चार पहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक खतरा रहता है। हादसा होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बढ़ती है, जबकि नियमित कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान कर खानापूर्ति किए जाने का आरोप है। जिले से आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-अयोध्या, आजमगढ़-गोरखपुर, आजमगढ़-बलिया, आजमगढ़ वाया शाहगंज-लखनऊ और आजमगढ़-प्रयागराज मार्ग गुजरते हैं। आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-प्रयागराज और आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग पर मोरंग, बालू, गिट्टी और बोल्डर लदे ...

Azamgarh: घाघरा में बाढ़ से बचाव को लेकर मॉक ड्रिल: बाढ़ से बचाव के बारे में दी जानकारी

आजमगढ़। देवारा क्षेत्र में घाघरा से घिरे हुए गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से कवायद जारी है।जिले में हर वर्ष घाघरा नदी में उफान होने के चलते देवारा क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ जाता है। जिसके चलते जहां गांव में पानी पहुंचने से लोग परेशान होते हैं। वहीं कटान होने से लोगों की कई एकड़ फसल योग्य भूमि भी कटान की जद में आ जाती है।
जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण आजमगढ़ ने गुरूवार को तहसील सगड़ी क्षेत्र के अंतर्गत बाढ़ प्रबंधक के लिए जिला स्तरीय मॉक एक्सरसाइज का आयोजन किया गया। इस दौरान स्टेजिंग एरिया पं. राम नगीना कॉलेज ऑफ फार्मेसी जोकहरा, सगड़ी में सभी संबंधित विभाग पीडब्ल्यूडी, पुलिस, पीएसी, अग्निशमन, एंबुलेंस, राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग, विद्युत विभाग, शिक्षा विभाग, पशु चिकित्सा, चिकित्सा विभाग, विकास विभाग, पंचायती राज विभाग के प्रभारी अधिकारी अपने-अपने सहयोगी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ आवश्यक संसाधनों सहित उपस्थित हुए। जहां पर लोगों को संभावित बाढ़ आने के दौरान डूब रहे व्यक्ति को कैसे बचाना है, कैसे अपने को बचाते हुए लोगों की मदद करनी है। इसकी भी जानकारी दी गई है। 
मॉक ड्रिल में गोताखोरों ने नदी में कूदकर डूब रहे लोगों को बाहर निकाला। साथ ही तत्काल एंबुलेंस के द्वारा बाढ़ राहत केंद्र भेजा गया, जहां पर उनका इलाज भी किया गया। लोगों को बाढ़ से बचाव की दी गई जानकारी। संभावित बाढ़ आपदा से बचने के उपाय पर यहाँ रिहर्सल किया गया है। जिसमें राप्ती नदी में डूब रहे व्यक्ति को गोताखोरों ने जाकर उनकी जान बचाई और तत्काल उन्हें बाढ़ राहत केन्द्र एंबुलेंस से भेजा गया। ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि संभावित बाढ़ आने पर जब कोई व्यक्ति नदी में डूब रहा हो तो उसे कैसे बचाया जाएगा। अपर जिलाधिकारी प्रशासन अनिल कुमार मिश्र ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक तहसील में बाढ़ राहत से संबंधित सामान उपलब्ध हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पांच प्रेक्षक नियुक्त हैं, जो पूरे क्षेत्र में घूम-घूमकर देखेंगे कि कहां पर क्या व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि प्रेक्षकों द्वारा पाई गई कमियों को दूर किया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व् डिप्टी इंसीडेंट कमांडर आजाद भगत सिंह ने बताया कि माक एक्सरसाइज के लिए चयनित स्थान एवं परिदृश्य व तहसील स्तर से प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ आने पर बचाव के लिए गांगेपुर में ईओसी से सूचना मिलने पर गांगेपुर के ग्रामीणों को बाढ़ के पानी बढ़ने की सूचना प्रदान करते हुए उन्हें सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने का माक ड्रिल किया गया। इसी के साथ ही सहबदिया सुल्तानपुर में ईओसी से सूचना मिलने पर राहत एवं बचाव दल के लोग गांव में जाकर 2 मंजिला भवन फंसे लोगों को घरों से निकालकर सुरक्षित स्थल पर पहुंचाने का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया। इसी के साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्र महुला में ईओसी से सूचना मिलने पर बाढ़ से घिरे, फंसे व डूबते हुए व्यक्तियों तथा पशुओं को नाव व अन्य संबंधित उपकरण की सहायता से सुरक्षित निकालने का प्रदर्शन संबंधित विभाग के कर्मचारियों द्वारा किया गया। अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 ने बताया कि बाढ़ राहत शिविर प्रा0वि0 दाममहुला में स्थापित किया गया है। जिसमें केन्द्र प्रभारी के निर्देशानुसार सभी टीमें आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करायेंगी। इनके साथ राजस्व विभाग व अन्य विभागों के कर्मचारी भी होंगे। यहॉ पर आपदा से विस्थापित लोगों को रखा जायेगा। उनकी चिकित्सा, भोजन, पानी, बिस्तर, शौचालय आदि की व्यवस्था होगी। राहत शिविर में मेडिकल कैंप भी होगा। पशुओं के देखभाल हेतु पशु चिकित्सा विभाग की टीम रहेगी।

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