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खास खबर

हाईवे पर मौत का जाल, जिम्मेदार बेखबर

 कहीं ट्रकों की अवैध पार्किंग तो कहीं सड़क पर गहरे गड्ढे, राहगीरों की जान जोखिम में हाइवे पर ट्रकों की पार्किंग और गड्ढे बढ़ा रहे हादसे का खतरा ट्रकों की अवैध पार्किंग और गड्ढों से हाइवे पर हादसों का खतरा एक लेन पर भारी वाहनों का कब्जा, रानी की सराय से कोटिला तक सड़क बदहाल आजमगढ़। जिले के नेशनल और स्टेट हाईवे पर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर भारी वाहनों की पार्किंग हादसों को न्योता दे रही है। हाईवे की पटरियों से लेकर एक लेन तक ट्रक और अन्य वाहन खड़े होने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रात के समय सड़क किनारे खड़े बड़े वाहनों के कारण बाइक, स्कूटी और चार पहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक खतरा रहता है। हादसा होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बढ़ती है, जबकि नियमित कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान कर खानापूर्ति किए जाने का आरोप है। जिले से आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-अयोध्या, आजमगढ़-गोरखपुर, आजमगढ़-बलिया, आजमगढ़ वाया शाहगंज-लखनऊ और आजमगढ़-प्रयागराज मार्ग गुजरते हैं। आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-प्रयागराज और आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग पर मोरंग, बालू, गिट्टी और बोल्डर लदे ...

Azamgarh: लापरवाह अधिकारियों के चलते शहर में दूसरे बस अड्डे की योजना अटकी

           नरौली में बन सकता है शहर का दूसरा बस अड्डा, चार हेक्टेयर भूमि आरक्षित
आजमगढ़। शहर के लोगों को एक और बस अड्डा मिल सकता है। लेकिन जिले के लापारवाह बने अधिकारियों के कारण योजना अटकी है। जबकि महायोजना-1985 में नरौली क्षेत्र में चार हेक्टेयर भूमि बस अड्डे के लिए आरक्षित है। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता ने इस सौगात से शहर के लोगों को दूर रखा है।

  बताते चलें कि आजमगढ़ परिक्षेत्र के सभी जनपदों में रोडवेज के दो-दो डिपो हैं। आजमगढ़ में आजमगढ़ और डॉ. आंबेडकर डिपो, मऊ में मऊ और दोहरीघाट डिपो एवं बलिया में बलिया और बेल्थरोड डिपो हैं। सभी डिपो के कार्यालय के साथ ही उनके अपने बेड़े भी हैं। आजमगढ़ डिपो की 81 और आंबेडकर डिपो में 73 बसें विभिन्न रूटों पर संचालित होती हैं। पहले पुराने बस अड्डे पर दोनों डिपो के ऑफिस और आंबेडकर डिपो का वर्कशाप भी था। लगभग 16 करोड़ से नए बस अड्डे के निर्माण के बाद आंबेडकर डिपो अब एक वर्कशाप के लिए तरस रहा है। वजह कि आंबेडकर डिपो का पूरा क्षेत्र नये बस अड्डे में समाहित हो गया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इस डिपो की वर्कशाप आदि अब सिर्फ कागजों में है। इस डिपो का संचालन नए बस अड्डे से ही हो रहा है। वहीं, नए बस अड्डे के आबादी के बीच होने से जाम की भी स्थिति बनी रहती है। इससे काफी परेशानी होती है। इसी वजह से नरौली क्षेत्र में नए बस अड्डे के लिए कवायद की गई थी।

एडीए के पत्र पर शुरू हुई थी पहल

आजमगढ़। आजमगढ़ विकास प्राधिकरण की 1985 की महायोजना में नरौली क्षेत्र में चार हेक्टेयर भूमि का प्रस्ताव बस अड्डे के लिए रखा गया है। इस संबंध में एडीए ने उक्त भूमि का भू उपयोग बरकरार रखने के बाबत परिवहन निगम को पत्र लिखा था। जवाब में निगम ने इसके भू उपयोग को बरकरार रखने की सिफारिश करते हुए नए बस अड्डे के निर्माण की कवायद शुरू की थी।

भूमि उपयुक्तता की जांच को बनी थी कमेटी

आजमगढ़। परिवहन निगम ने नए बस अड्डे के लिए पांच हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई थी। प्रारंभिक तौर पर नरौली में प्रस्तावित भूमि को उपयुक्त एवं अच्छी लोकेशन पर बताया गया था। साथ ही भूमि संबंधी रिपोर्ट देने के लिए कमेटी गठित की गई थी। जिसमें क्षेत्रीय प्रबंधक को अध्यक्ष, सेवा प्रबंधक, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक वित्त, सहायक अभियंता भवन, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आंबेडकर डिपो सदस्य बनाया गया था। गठित कमेटी को भूमि की जांच कर रिपोर्ट परिवहन निगम मुख्यालय को भेजी थी। इसके बाद भूमि खरीद और बस अड्डे के निर्माण का प्रपोजल तैयार किया जाना था लेकिन इस पर काम ही नहीं हो सका।

एआरएम अंबेडकरनगर डिपो रामेश सिंह

अभी पदभार ग्रहण किया है। जानकारी लेते हैं। यदि डिपो के लिए भूमि आरक्षित की गई है तो उसपर आगे की कार्ययोजना बनाकर कार्य करने का प्रयास होगा।

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