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सागर पैलेस में गणेश पूजन व दीप प्रज्वलन के साथ पहली शादी की शुरुआत

आधुनिक सुविधा से सुसज्जित मैरिज हॉल से क्षेत्र को मिली बड़ी सौगात, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर ठेकमा। क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण उस समय आया जब आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित ‘सागर पैलेस’ मैरिज हॉल में गणेश पूजन व दीप प्रज्वलन के साथ पहली शादी की शुरुआत की गई। मैरिज हॉल के संस्थापक राम प्यारे राय ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ कराया। क्षेत्र में पहले विवाह एवं अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए समुचित व्यवस्था न होने के कारण लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता था। ऐसे में सागर पैलेस के शुरू होने से अब क्षेत्रवासियों को एक सुसज्जित और व्यवस्थित स्थान मिल गया है, जहां विवाह, मांगलिक कार्यक्रम और सामाजिक आयोजन आसानी से आयोजित किए जा सकेंगे। सागर पैलेस के संचालन से क्षेत्र में रोजगार सृजन की दिशा में भी एक अहम पहल हुई है, जिससे स्थानीय लोगों को काम के अवसर मिलेंगे। ज्ञात हो कि 22 जुलाई 2024 को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन कर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई थी। निरंतर प्रयासों के बाद निर्माण कार्य पूरा हुआ और 11 फरवरी 2026 को गृह प्रवेश के साथ इसे औपचारिक रूप ...

Azamgarh: मुख्तार प्रकरण में 18 को आ सकता है फैसला



आजमगढ़। माफिया मुख्तार के खिलाफ जिले में चल रहे मुकदमें में 18 जुलाई को फैसला आ सकता है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्तार अंसारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में पेश हुआ। पेशी के दौरान उसने जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाया। तरवां थाना क्षेत्र के एराकला गांव में सड़क निर्माण ठेके के विवाद को लेकर ठेकेदार पर माफिया मुख्तार के लोगों ने फायरिंग किया था। जिसमें ठेकेदार तो बाल-बाल बच गए थे लेकिन दो मजदूर गोली लगने से घायल हो गए थे। जिसमें एक मजदूर की इलाज के दौरान मौत तक हो गई। इस मामले में तरवां थाने में मुख्तार व उसके सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया। अक्टूर 2020 में इस मामले में गैंगेस्टर के तहत भी कार्रवाई हुई और माफिया मुख्तार व उसके सहयोगियों पर गैंगेस्टर जनपद पुलिस ने लगा दिया। मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में चल रही है। बुधवार को अंतिम सुनवाई होनी थी। जिसमें माफिया मुख्तार बांदा जेल से वीसी के माध्यम से उपस्थित हुआ। इस दौरान उसने पुन: अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई। बुधवार को हुई बहस के दौरान मुख्तार के वकील लल्लन सिंह ने कहा कि मुकदमा 2014 में दर्ज हुआ और छह साल बाद गैंगेस्टर की कार्रवाई की गई। जबकि मुख्तार पिछले कई सालों से जेल में है। मुख्तार के वकील के इस बात का सरकारी वकील दीपक मिश्रा ने विरोध किया। बुधवार को न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट ओमप्रकाश ने सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित कर दिया। अब सजा सुनाए जाने के लिए 18 जुलाई की तिथि नियत की गई है।

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