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खास खबर

आईएनएस ऑटोमोबाइल्स ने लॉन्च किया नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW

मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम आजमगढ़ । इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही आईएनएस ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ग्राहकों के लिए नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW बाजार में उतारा है। कंपनी का दावा है कि यह ई-रिक्शा मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम है, जो चालक और यात्रियों दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  कंपनी के अनुसार, IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW में मजबूत बॉडी, आकर्षक डिजाइन और आरामदायक सीटिंग व्यवस्था दी गई है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक सफर का अनुभव मिलता है। वहीं, चालक के लिए यह वाहन कम रखरखाव लागत और बेहतर कमाई का अवसर प्रदान करता है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि बढ़ती ई-रिक्शा मांग को देखते हुए इस मॉडल को आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता मानकों के साथ विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक भरोसेमंद और लाभदायक विकल्प उपलब्ध कराना है।आईएनएस ऑटोमोबाइल्स का मानना है कि यह नया मॉडल शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं को और अधिक सुगम बनाएगा। लॉन्च के साथ ह...

Azamgarh : गंगा दशहरा कल, विशेष दान-पुण्‍य करें तो मिलेगी दस जन्‍मों के पापों से मुक्ति, जानें शुभ मुहूर्त


महाराजगंज में भैरव बाबा के स्थान पर गंगा दशहरा मेला 

आजमगढ़। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन ही भागीरथ गंगा को धरती पर लाए थे। इस दिन गंगा धरती पर अवतरित हुईं थीं, जिसे हम गंगा दशहरा के नाम से मनाते हैं। इस बार गंगा दशहरा नौ जून को है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जेठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन हस्त नक्षत्र में मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर आईं थीं। इस साल हस्त नक्षत्र नौ जून को सुबह 4:32 से लेकर 10 जून शुक्रवार सुबह 4:26 बजे तक रहेगा, जबकि दशमी तिथि नौ जून को सुबह 8:22 से शुरू होकर 10 जून सुबह 7:25 बजे तक रहेगी। इसे ‘गंगावतरण’ भी कहते हैं।

भैरो बाबा स्थान पर माता सती ने हवन कुंड में कुद दी थी जानः जिला मुख्यालय से 30 किमी महाराजगंज स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल भैरो बाबा का स्थान लोगों की अस्था का केंद्र है। पौराणिक कथा के अनुसार यहां प्रजापति राजा दक्ष के यज्ञ में सती ने अपना शरीर भस्म कर लिया था। शंकर जी के गण वीरभद्र (काल भैरव) आदि ने यज्ञ का विध्वंस कर दिया था तथा भैरव जी यहीं स्थापित हो गए थे। यहां प्रत्येक मंगलवार और पूर्णिमा को मेले लगते हैंं। यह प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। भैरो बाबा मंदिर पर वैसे तो प्रतिदिन लोग दर्शन-पूजन करने के लिए लोग आते हैं। मान्यता है कि बाबा का स्मरण करके यदि मिर्च चढ़ाकर मन्नत मांगी जाए तो वह अवश्य पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर रामायण पाठ, हरिकीर्तन और घंटा बांधते हैं। भैरो बाबा के दर्शन करने से पहले लोग ऐतिहासिक पोखरे में स्नान-ध्यान करते हैं। मंदिर में पश्चिम तरफ हवन-कुंड है। राजा दक्ष द्वारा यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित न करने और अपमानित करने से नाराज होकर माता सती ने हवन कुंड में कुदकर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। वहीं मंदिर से लगभग पांच सौ मीटर दूर रविदास मंदिर के सामने एक पानी का श्रोत है। जहां से हमेशा शुद्ध पानी निकलता रहता है। यहां पर शिवरात्रि के दिन भोले शंकर और पार्वती जी का विवाह होता है। नौ जून को गंगा दशहरा पर लगने वाले मेले की तैयारियों जोर-शोर से चल रही हैं। स्थानीय सहित अन्य जिलों के दुकानदार दुकाने सज गई हैं। एक सप्ताह चलने वाले मेले में झुला, सर्कस, थियेटर आदि लोगों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। लोगों का मानना है कि यहां मांगी गई मुराद पूरी हो जाती है। मन्नत पूरे होने पर श्रद्धालु मिर्च चढ़ाते हैं। नौ जून को गंगा दशहरा पर यहां मेला लगेगा। जिसकी तैयारियां पूरी हो गई हैं। 

गंगा अवतरण कथा : भागीरथ एक प्रतापी राजा थे। अपने पूर्वजों को जीवन मरण के दोष से मुक्त करने तथा गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या प्रारंभ की। गंगा उनकी तपस्या से प्रसन्न हुईं तथा स्वर्ग से पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हो गईं। उन्होंने भागीरथ से कहा कि यदि वे सीधे स्वर्ग से पृथ्वी पर गिरेंगी तो पृथ्वी उनका वेग नहीं सह पाएगी और वह रसातल में चली जाएगी। यह सुनकर भागीरथ सोच में पड़ गए। तब भगीरथ ने भगवान शिव की उपासना शुरू कर दी। संसार के दुखों को हरने वाले भगवान शिव जी प्रसन्न हुए और भागीरथ से वर मांगने को कहा। भागीरथ ने उनसे आपनी बाद कह दी। गंगा जैसे ही स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरने लगीं गंगा का गर्व दूर करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें जटाओं में कैद कर लिया। इस पर गंगा ने शिव से माफी मांगी तो एक छोटे से पोखरे में छोड़ दिया वहां से गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ। युगों युगो तक बहने वाली गंगा की धारा महाराज भागीरथ की कस्टमय साधना की गाथा कहती है। गंगा प्राणी मात्र को जीवनदान ही नहीं देती मुक्ति भी देती है।

गंगा जी में स्नान न कर सकें तो घर के पानी में मिला ले थोड़ा से गंगाजल: गंगा दशहरा पर गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान दान पुण्य का विशेष महत्व है। हिंदू संस्कृति में किसी भी शुभ कार्य/शुद्धि के लिए गंगा जल प्रयोग में लाते हैं। अगर गंगा में स्नान न कर सकें तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और गंगा जी का पूजन करेंं। इस दिन 10 अंक का विशेष महत्व है। पूजा करते समय सभी सामग्री को 10 की मात्रा में चढ़ाएं। जैसे- 10 फूल, 10 दीपक, 10 फल आदि इस दिन दान का भी महत्व है। ऐसा करने वाला महापातकों के बराबर के दस पापों से छूट जाता है।

मां गंगा का पवित्र पावन मंत्र : ओम नमो भगवती हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा। गंगा दशहरा पूजन विधिइस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों को होकर गंगा स्नान कर लें।अगर आप गंगा नदी स्नान के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर स्नान कर लें।स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल लेकर सूर्य को अर्घ्य दें।इसके साथ ही गंगा मां को फूल, सिंदूर आदि अर्पित करने के साथ दीपदान करें।अंत में गंगा जी के मंत्रों का जाप कर लें।





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