सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

खास खबर

24 घंटे की तलाश के बाद 10 वर्षीय वैभव का शव पड़ोसी के बेसमेंट से बरामद, हत्या का आरोप

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पड़ोसी हिरासत में पूछताछ में हत्या की बात कबूल, कस्बे में शोक और आक्रोश गोरखपुर। खजनी कस्बे में सर्राफा कारोबारी के 10 वर्षीय पौत्र वैभव वर्मा की अपहरण के बाद हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। करीब 24 घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस ने पड़ोसी सर्वेश भट्ट को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी के बयान के आधार पर उसके घर के बेसमेंट से वैभव का शव बरामद किया गया। जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर स्कूल से घर लौटने के बाद वैभव साइकिल लेकर खेलने निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। कुछ देर बाद उसकी साइकिल और एक चप्पल खेत के पास मिली, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी डॉ. कौस्तुभ के निर्देशन में पांच टीमें गठित की गईं। डॉग स्क्वॉयड, फॉरेंसिक टीम और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से जांच आगे बढ़ाई गई। सीसीटीवी फुटेज में वैभव के पीछे पड़ोसी सर्वेश भट्ट जाता दिखाई दिया। इसी आधार पर पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने हत्या की बात स्वीकार की और उसकी निशानदेही पर ...

Gorakhpur: आंखों के लिए तेजाब से खतरनाक है खैनी का चूना

एक माइक्रोग्राम भी चूना आंखों के लिए खतरनाक

99 प्रतिशत मरीजों की रोशनी जाने का खतरा

गोरखपुर।  खैनी का चूना आंखों के लिए तेजाब से भी खतरनाक है। इससे आंखों की रोशनी के जाने का भी खतरा बना रहता है। इस संबंध में बीआरडी मे‌डिकल कालेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. रामकुमार जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि खैनी का चूना या आम चूना (अल्कली बर्न) एसिड की तुलना में आंखों के लिए ज्यादा खतरनाक है। यह कम समय में आंखों के अंदर चला जाता है, इसकी वजह से कर्निया (पुतली) खराब हो जाती है। इसका शिकार अधिकांश बच्चे होते हैं।
  डा. रामकुमार ने बताया कि खैनी का चूना जिसकी आंखों में गया और उसका इमरजेंसी में इलाज नहीं हुआ तो ऐसे 99 प्रतिशत मरीजों की रोशनी चली जाती है। चूना आंख की पुतली को जला और गला देता है। कई बार पलक और पुतली दोनों चिपक जाती है, जिनका ऑपरेशन करना भी बेहद मुश्किल होता है। क्योंकि, चिपकने की वजह से कर्निया गल जाती है। इस तरह के केस 15 दिन पूर्व ही बीआरडी में आए थे। बताया कि खैनी का या साधारण चूना दोनों ज्यादा खतरनाक है। गलती से यह बच्चों या बड़ों की आंखों में चला जाए तो तत्काल इलाज शुरू कर दें। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. योगेश छापड़िया बताया कि अगर आंखों में एक माइक्रोग्राम चूना भी रह जाता है तो वह धीरे-धीरे कर्निया को गला देता है। डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि बीआरडी में हर माह चार से पांच केस इस तरह के आ रहे हैं।  बचाव की जानकारी देते हुए बताया कि अगर आंख में चूना चला जाए तो तत्काल साफ पानी से आंखों को लगातार धुलते रहें और नजदीकी नेत्र चिकित्सक से संपर्क कर दवा लें। उन्होंने बताया कि कुछ इस प्रकार का केस बस्ती में प्रकाश में आया था। यहां के रहने वाले 12 साल का बालक खेल रहा था। गलती से उसके आंखों में खैनी का चूना चला गया। इसका दुष्प्रभाव यह हुआ कि उसके आंखों की पलक और पुतली चिपक गई। परिजन इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर आएं, जहां पर डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन इलाज में देरी की वजह से उसके आंखों की 70 प्रतिशत रोशनी चली गई। अभी भी उसका इलाज चल रहा है। इसी क्रम में एक और केस में संतकबीरनगर के रहने वाला सात साल का मासूम घर में खेल रहा था। खेलते-खेलते उसके हाथ में खैनी का चूना आ गया और उसकी आंखों में चला गया। परिजन पहले संतकबीरनगर जिला अस्पताल लेकर गए। डॉक्टरों ने बीआरडी रेफर कर दिया। लेकिन, परिजन शहर के डॉ. योगेश छापड़िया के यहां लेकर आए, जहां पर उसका इलाज चल रहा है। उसकी आंखों की रोशनी जाने का खतरा बढ़ गया है।

सर्वाधिक पढ़ीं गईं