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हाईवे पर मौत का जाल, जिम्मेदार बेखबर

 कहीं ट्रकों की अवैध पार्किंग तो कहीं सड़क पर गहरे गड्ढे, राहगीरों की जान जोखिम में हाइवे पर ट्रकों की पार्किंग और गड्ढे बढ़ा रहे हादसे का खतरा ट्रकों की अवैध पार्किंग और गड्ढों से हाइवे पर हादसों का खतरा एक लेन पर भारी वाहनों का कब्जा, रानी की सराय से कोटिला तक सड़क बदहाल आजमगढ़। जिले के नेशनल और स्टेट हाईवे पर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर भारी वाहनों की पार्किंग हादसों को न्योता दे रही है। हाईवे की पटरियों से लेकर एक लेन तक ट्रक और अन्य वाहन खड़े होने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रात के समय सड़क किनारे खड़े बड़े वाहनों के कारण बाइक, स्कूटी और चार पहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक खतरा रहता है। हादसा होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बढ़ती है, जबकि नियमित कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान कर खानापूर्ति किए जाने का आरोप है। जिले से आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-अयोध्या, आजमगढ़-गोरखपुर, आजमगढ़-बलिया, आजमगढ़ वाया शाहगंज-लखनऊ और आजमगढ़-प्रयागराज मार्ग गुजरते हैं। आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-प्रयागराज और आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग पर मोरंग, बालू, गिट्टी और बोल्डर लदे ...

Gorakhpur: आंखों के लिए तेजाब से खतरनाक है खैनी का चूना

एक माइक्रोग्राम भी चूना आंखों के लिए खतरनाक

99 प्रतिशत मरीजों की रोशनी जाने का खतरा

गोरखपुर।  खैनी का चूना आंखों के लिए तेजाब से भी खतरनाक है। इससे आंखों की रोशनी के जाने का भी खतरा बना रहता है। इस संबंध में बीआरडी मे‌डिकल कालेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. रामकुमार जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि खैनी का चूना या आम चूना (अल्कली बर्न) एसिड की तुलना में आंखों के लिए ज्यादा खतरनाक है। यह कम समय में आंखों के अंदर चला जाता है, इसकी वजह से कर्निया (पुतली) खराब हो जाती है। इसका शिकार अधिकांश बच्चे होते हैं।
  डा. रामकुमार ने बताया कि खैनी का चूना जिसकी आंखों में गया और उसका इमरजेंसी में इलाज नहीं हुआ तो ऐसे 99 प्रतिशत मरीजों की रोशनी चली जाती है। चूना आंख की पुतली को जला और गला देता है। कई बार पलक और पुतली दोनों चिपक जाती है, जिनका ऑपरेशन करना भी बेहद मुश्किल होता है। क्योंकि, चिपकने की वजह से कर्निया गल जाती है। इस तरह के केस 15 दिन पूर्व ही बीआरडी में आए थे। बताया कि खैनी का या साधारण चूना दोनों ज्यादा खतरनाक है। गलती से यह बच्चों या बड़ों की आंखों में चला जाए तो तत्काल इलाज शुरू कर दें। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. योगेश छापड़िया बताया कि अगर आंखों में एक माइक्रोग्राम चूना भी रह जाता है तो वह धीरे-धीरे कर्निया को गला देता है। डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि बीआरडी में हर माह चार से पांच केस इस तरह के आ रहे हैं।  बचाव की जानकारी देते हुए बताया कि अगर आंख में चूना चला जाए तो तत्काल साफ पानी से आंखों को लगातार धुलते रहें और नजदीकी नेत्र चिकित्सक से संपर्क कर दवा लें। उन्होंने बताया कि कुछ इस प्रकार का केस बस्ती में प्रकाश में आया था। यहां के रहने वाले 12 साल का बालक खेल रहा था। गलती से उसके आंखों में खैनी का चूना चला गया। इसका दुष्प्रभाव यह हुआ कि उसके आंखों की पलक और पुतली चिपक गई। परिजन इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर आएं, जहां पर डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन इलाज में देरी की वजह से उसके आंखों की 70 प्रतिशत रोशनी चली गई। अभी भी उसका इलाज चल रहा है। इसी क्रम में एक और केस में संतकबीरनगर के रहने वाला सात साल का मासूम घर में खेल रहा था। खेलते-खेलते उसके हाथ में खैनी का चूना आ गया और उसकी आंखों में चला गया। परिजन पहले संतकबीरनगर जिला अस्पताल लेकर गए। डॉक्टरों ने बीआरडी रेफर कर दिया। लेकिन, परिजन शहर के डॉ. योगेश छापड़िया के यहां लेकर आए, जहां पर उसका इलाज चल रहा है। उसकी आंखों की रोशनी जाने का खतरा बढ़ गया है।

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