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बाजबहादुर में पैतृक मकान विवाद में दो पक्ष आमने-सामने, दोनों ने दर्ज कराया मुकदमा

मरम्मत और निर्माण कार्य को लेकर हुआ विवाद, पुलिस ने शुरू की जांच आजमगढ़। शहर कोतवाली क्षेत्र के बाजबहादुर मोहल्ले में पैतृक मकान और निर्माण कार्य को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पहले पक्ष के मो. अनस पुत्र अब्दुल कुद्दूस ने आरोप लगाया कि 28 जुलाई को वह अपने पैतृक मकान की मरम्मत करा रहे थे। इसी दौरान पुराने विवाद को लेकर विपक्षी पक्ष के लोग मौके पर पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए निर्माण कार्य रुकवाने लगे। विरोध करने पर कुल्हाड़ी, लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया, जिससे वह और बीच-बचाव करने आए उनके परिजन घायल हो गए। आरोप है कि जाते समय विपक्षियों ने जान से मारने की धमकी भी दी। वहीं दूसरे पक्ष के मो. आमिर पुत्र अब्दुल सलाम ने अपनी तहरीर में कहा कि पैतृक मकान का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद विपक्षी पक्ष जबरन निर्माण कार्य करा रहा था। रोकने पर पहले से टांगी, लोहे की रॉड और ल...

मेंहनगर: सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं महर्षि वाल्मीकिः प्रधान गीता देवी

 वाल्मीकि जयंती पर सुंदरकांड पाठ, आरती के बाद वितरित हुआ प्रसाद

मेंहनगर। ब्लाक स्थित विभिन्न ‌मंदिरों सहित अन्य चिन्हित स्थानों पर रविवार को सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। इस दौरान विधि-विधान से पूजन के बाद सुंदरकांड पाठ हुआ। आरती के बाद प्रसाद का वितरण किया गया।

  करौती कंपोजिट विद्यालय स्थित शिवमंदिर में ग्राम पंचायत अधिकारी रामअवध यादव की उपस्थिति में ग्रामीणों के सहयोग से दो-दो की टोली में सुंदर पाठ का आयोजन किया गया। पाठ समापन पर आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। खंड विकास अधिकारी विकास शुक्ला ने बताया कि ब्लाक के 83 ग्राम पंचायतों में स्थित मंदिरों में दो पाली में सुंदरकांड पाठ का आयोजन कराया गया हैं। प्रधान गीता देवी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी विश्व के आदि कवि हैं, इन्होंने सर्वप्रथम काव्य की रचना रामायण महाकाव्य के रूप में की थी। वाल्मीकि जयंती के अवसर पर इस प्रकार के आयोजन से हमारी सांस्कृतिक विरासत मजबूत होगी और समाज को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणा प्राप्त होगी। महर्षि वाल्मीकि सामाजिक समरसता के प्रतीक थे। इनके द्वारा रचित रामायण आदर्श सामाजिक संरचना के लिए मानक प्रस्तुत करता है। ऐसे आयोजनों से हम अपने गौरवशाली परंपरा को स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि सप्तऋषियों के बताने पर महर्षि वाल्मीकि जी ने राम नाम के जप का उच्चारण मरा-मरा कहकर किया था, जिससे तीनों लोगों की बातें जानने वाले महाविद्वान हो गए और उन्होंने भगवान श्रीराम के समय में रामायण महाकाव्य की रचना की थी। इस दौरान पंचायत सहायक फरजाना बानो, रोजगार सेवक अनिरुद्ध प्रसाद, संतोष कुमार, पथरु बाबा उपस्थित रहे ।

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