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खास खबर

आईएनएस ऑटोमोबाइल्स ने लॉन्च किया नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW

मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम आजमगढ़ । इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही आईएनएस ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ग्राहकों के लिए नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW बाजार में उतारा है। कंपनी का दावा है कि यह ई-रिक्शा मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम है, जो चालक और यात्रियों दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  कंपनी के अनुसार, IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW में मजबूत बॉडी, आकर्षक डिजाइन और आरामदायक सीटिंग व्यवस्था दी गई है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक सफर का अनुभव मिलता है। वहीं, चालक के लिए यह वाहन कम रखरखाव लागत और बेहतर कमाई का अवसर प्रदान करता है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि बढ़ती ई-रिक्शा मांग को देखते हुए इस मॉडल को आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता मानकों के साथ विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक भरोसेमंद और लाभदायक विकल्प उपलब्ध कराना है।आईएनएस ऑटोमोबाइल्स का मानना है कि यह नया मॉडल शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं को और अधिक सुगम बनाएगा। लॉन्च के साथ ह...

Gorakhpur: श्री रामलीला शुरू, शिव सती संवाद और नारद मोह का मंचन

हर-हर महादेव, श्रीराम के जयकारे से क्षेत्र हुआ भक्तिमय, श्रीरामलीला देखने पहुंचे श्रद्धालु 

गोरखपुर। बर्डघाट के रामलीला मैदान में श्री रामलीला की शुरूआत हो गई। गुरूवार की रात यहां भूमि पूजन के बाद रामलीला का शुभारंभ हुआ। अयोध्या की रामलीला मंडली के कलाकारों ने पहले दिन शिव सती संवाद और नारद मोह का मंचन किया। जिससे कि यहां का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। देर रात तक रामलीला देखने के लिए दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही।

मंचन में दिखाया गया, नारद जी हिमालय में जाकर तपस्या में लीन हो जाते हैं। जिसके कारण इन्द्रासन हिल गया। इन्द्र यह दृश्य देखकर घबड़ा गये और पता लगाने के लिये कामदेव जी को हिमालय पर भेजा। लेकिन कामदेव जी तपस्या भंग नहीं कर सके। तब कामदेव जी चरण वंदना करते हैं। नारद जी का ध्यान भंग हुआ और नारद को अभिमान हो गया कि हमने कामदेव को जीत लिया। यह बात भगवान शंकर को जाकर बताते हैं। शंकर जी ने कहा कि यह बात विष्णु जी से मत बताईयेगा। लेकिन नारद जी यह बात नहीं माने और विष्णु जी के पास जाकर सारी बात बताई कि मैंने कामदेव जी को जीत लिया। विष्णु जी ने तब एक मायानगरी का निर्माण किया। जिसमें एक कन्या उत्पन्न हुई जिसका नाम विश्वमोहिनी था। फिर विष्णु भगवान ने सोचा कि मेरे भक्त के हृदय में अहंकार उत्पन्न हो गया है। इस अहंकार को दूर करना चाहिए। विष्णु जी ने तब एक मायानगरी का निर्माण किया। जिसमें एक कन्या उत्पन्न हुई जिसका नाम विश्वमोहिनी था। 

नारद जी विश्वमोहिनी का रुप देखकर मोहित हो गये। नारद जी ने मन बनाया कि क्यों न इस कन्या से विवाह कर लिया जाये। तब नारद जी विष्णु भगवान का ध्यान करते हैं और विष्णु भगवान वहीं प्रकट होते हैं। नारद जी अपने मन की इच्छा विष्णु भगवान जी से बताते हैं और विष्णु भगवान से कहते हैं आप अपना रुप कुछ समय के लिए मुझे दे दें। जिससे स्वयंवर में जाकर मैं विवाह कर लूं। भगवान जी ने नारद जी को बंदर का रुप देते हैं। नारद जी वह रुप लेकर स्वयंवर में पहुंचते हैं। तब विष्णु भगवान जी ने नारद जी को बंदर का रुप देते हैं। नारद जी वह रुप लेकर स्वयंवर में पहुंचते हैं। वहां शिव जी के दो भक्तगण नारद जी की प्रशंसा करते हैं कि आप बहुत सुन्दर हैं। विष्णु जी स्वयंवर में अपना रुप धारण करके जाते हैं और विश्वमोहिनी से विवाह कर लेते हैं। यह दृश्य देखकर नारद जी क्रोधित हो जाते हैं और अपना चेहरा पानी में देखते हैं और बंदर का रुप देखकर शिवगण को श्राप देते हैं कि तुम राक्षस बन जाओ और विष्णु जी को श्राप देते हैं जिस मानव का रुप धारण करके तुमने मुझसे विश्वमोहिनी को छीना है। एक बार मृत्युलोक में आपको जाना है और जिस बंदर का रुप आपने मुझे दिया वही बंदर विपत्ति के समय में आपका साथ देंगे। मैदान में बैठे लोग भगवान विष्णु जी की जय-जयकार करने लगते हैं। जिस प्रकार से मैं विश्वमोहिनी के लिए तड़प रहा हूं, उसी प्रकार मृत्युलोक में आप भी स्त्री के लिये तड़पेंगे। तब विष्णु भगवान जी अपनी मायारुप को हटा देते हैं। तब नारद जी को वास्तविक ज्ञान होता है। तब वह प्रभु से क्षमा याचना करते हैं। मैदान में बैठे लोग भगवान विष्णु जी की जय-जयकार करने लगते हैं।

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