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युवतियों को प्रेमजाल में फंसाकर बेचने के आरोप में दंपती गिरफ्तार

अहरौला पुलिस ने बिहार के पूर्वी चंपारण में दी दबिश 18 वर्षीय युवती की तलाश के दौरान सामने आया कथित मानव तस्करी का मामला आजमगढ़। युवती को बहला-फुसलाकर भगाने और कथित मानव तस्करी के मामले में अहरौला पुलिस ने बिहार के पूर्वी चंपारण से एक दंपती को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में युवतियों को प्रेमजाल में फंसाकर दूसरे लोगों के हाथों बेचने का मामला सामने आया है। प्रकरण में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, 18 मार्च 2026 को अहरौला थाना क्षेत्र की एक महिला ने अपनी करीब 18 वर्षीय पुत्री के घर से बिना बताए चले जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में मुकदमा दर्ज कर युवती की तलाश शुरू की गई। विवेचना के दौरान मानव तस्करी से जुड़े तथ्य सामने आने पर मुकदमे में अन्य धाराओं की बढ़ोतरी की गई। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से आरोपियों की लोकेशन पूर्वी चंपारण में ट्रेस की। इसके बाद पांच नवंबर को चकिया स्थित चनकपुरी महावीर आई अस्पताल के पास से अभिषेक राज और उसकी पत्नी सितारा खातून को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में अभिषेक ने युवतियों को प्रेमजाल में...

Azamgarh: गोरखपुर की रेडियोलॉजिस्ट के डिग्री पर जौनपुर में खोल दिया डायग्नाोस्टिक सेंटर, एफआईआर दर्ज


 

आजमगढ़. अस्पतालों के नाम गोरखधंधा आम बात है लेकिन जौनपुर के शुभम हॉस्पिटल के संचालक तो हद ही पार कर दी। उसने गोरखपुर की रहने वाली रोडियोलॉजिस्ट डा. पल्लवी की डिग्री का इस्तेमाल कर डायग्नोस्टिक सेंटर खोल दिया। जब डॉ. पल्लवी सीएमओ दफ्तर में पंजीकरण के लिए पहुंची तो उन्हें इसकी जानकारी हुई। अब डॉ. पल्लवी ने अस्पताल प्रबंधन पर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें शुभम हॉस्पिटल के संचालक देवी सिंह, आपरेटर मनोज कुमार और लिपिक सुधीर अस्थाना को नामजद किया गया है।

बता दें कि डॉ. पल्लवी गोरखपुर जिले के सिकटौर के पाम पैराडाइज की निवासी हैं। पल्लवी ने डीआईजी को पत्र लिख कर आरोप लगाया था कि उन्होंने लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से रेडियोडायग्नोसिस में एमडी किया है। 30 जनवरी 2022 तक वे लखनऊ के डायग्नोसिस सेंटर में काम करती थी। पिछले दिनों वे गोरखपुर सीएमओ कार्यालय में पीसीपीएनडीटी पंजीकरण कराने गई थी। इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनके नाम से जौनपुर जिले के गुना पार में शुभम हॉस्पिटल पंजीकरण है। इसके बाद वे जौनपुर सीएओ कार्यालय पहुंची और जानकारी मांगा तो लिपिक ने इस संदर्भ में जानकारी देने से इनकार कर दिया। सीएमओ के हस्तक्षेप के बाद उन्हें दस्तावेज दिए गए। डॉ. पल्लवी को जो दस्तावेज मिले उसमें उनकी डिग्री, आधार कार्ड, फोटो और हस्ताक्षर सहित शुभम हॉस्पिटल का आवेदन पत्र शामिल था। इस मामले में डीआईजी के निर्देश पर शहर कोतवाली पुलिस ने एफआईआर पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है। वहीं शुभम हॉस्पिटल की डॉ. बबिता सिंह ने बताया सारी जिम्मेदारी लिपिक के सिर मढ़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है लिपिक ने 3 लाख लेकर उन्हें दस्तावेज दिए थे।



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