सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

खास खबर

हाईवे पर मौत का जाल, जिम्मेदार बेखबर

 कहीं ट्रकों की अवैध पार्किंग तो कहीं सड़क पर गहरे गड्ढे, राहगीरों की जान जोखिम में हाइवे पर ट्रकों की पार्किंग और गड्ढे बढ़ा रहे हादसे का खतरा ट्रकों की अवैध पार्किंग और गड्ढों से हाइवे पर हादसों का खतरा एक लेन पर भारी वाहनों का कब्जा, रानी की सराय से कोटिला तक सड़क बदहाल आजमगढ़। जिले के नेशनल और स्टेट हाईवे पर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर भारी वाहनों की पार्किंग हादसों को न्योता दे रही है। हाईवे की पटरियों से लेकर एक लेन तक ट्रक और अन्य वाहन खड़े होने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रात के समय सड़क किनारे खड़े बड़े वाहनों के कारण बाइक, स्कूटी और चार पहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक खतरा रहता है। हादसा होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बढ़ती है, जबकि नियमित कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान कर खानापूर्ति किए जाने का आरोप है। जिले से आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-अयोध्या, आजमगढ़-गोरखपुर, आजमगढ़-बलिया, आजमगढ़ वाया शाहगंज-लखनऊ और आजमगढ़-प्रयागराज मार्ग गुजरते हैं। आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-प्रयागराज और आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग पर मोरंग, बालू, गिट्टी और बोल्डर लदे ...

Sultanpur: 16 करोड़ का इंजेक्शन बचा सकता है अनमय का जीवन

 

अपील के बाद खाते में पहुंचे 40 लाख

सुलतानपुर। ज‍िले में आठ माह के बच्चे को है मस्कुलर एट्रोफी बीमारी इंटरनेट मीडिया के जरिए मदद को बढ़े सैकड़ों हाथ। डाक्टरों ने बताया कि इस बीमारी से ग्रसित बच्चे के इलाज में कारगर इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रुपये है।

 कहते हैं कि संकट में अपनों की पहचान होती है, लेकिन यहां तो सैकड़ों हाथ नन्हें अनमय की जान बचाने को आगे आए हैं। हर कोई उसे अपना मान इंटरनेट मीडिया के जरिए मदद की अपील कर रहा। इसी का नतीजा है कि कुछ ही दिनों में 40 लाख रुपये आ गए। सौरमऊ निवासी सुमित सिंह ने बताया कि जब बेटा तीन माह का था तो उसके हाथ और पैर में हरकतें कम दिखने लगीं। उसकी गर्दन का संतुलन भी बन पाना मुश्किल होने लगा। बच्चे को तब किंग जार्ज मेडिकल कालेज, लखनऊ में दिखाना शुरू किया। दो-तीन महीने तक इलाज कराने के बाद उसके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे सर गंगा राम हास्पिटल, नई दिल्ली के डाक्टरों को दिखाया। वहां के चिकित्सकों ने लक्षणों के आधार पर टेस्ट कराया। इस टेस्ट की रिपोर्ट 29 जुलाई को मिलने पर पता चला कि अनमय को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-वन नामक बीमारी है। डाक्टरों ने बताया कि इस बीमारी बीमारी से ग्रसित बच्चा दो साल से ज्यादा जीवित नहीं रह पाता। इलाज में सिर्फ एक इंजेक्शन कारगर है। इसे नावार्टिस कंपनी बनाती है। विदेश में मिलने वाले इस इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रुपये है। इतना महंगा इंजेक्शन सुनकर परिवारजन के होश उड़ गए। बेबस पिता ने बच्चे को बचाने के लिए उम्मीद की आखिरी किरण तक संघर्ष का इरादा कर रखा है। सुमित बताते हैं कि उन्होंने सबसे पहले इंटरनेट मीडिया पर अपनी दुखभरी कहानी साझा की। बच्चे का जीवन बचाने के लिए मदद की गुहार लगाई। उसके बाद तो एक बड़ा अभियान ही शुरू हो गया। कई स्वयं सेवी संस्थाओं ने पहल करते हुए इस अभियान को सफल बनाने के लिए दिन-रात एक कर दी। इसका परिणाम यह रहा कि शुक्रवार तक खाते में चालीस लाख रुपये इकट्ठा हो चुके हैं। सुमित सिंह बताते हैं कि इस अभियान में देवदूत वानर सेना के अजीत प्रताप सिंह, कुशभवनपुर सेवा समिति के रीतेश रजवाड़ा, घर सुलतानपुर फाउंडेशन, करणी सेना, हमारी आवाज जनता और कई जनप्रतिनिधियों का सहयोग मिला। वहीं, अनमय की मां अंकिता सिंह ने खुद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सहायता की मांग की है। जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 16 करोड़ रुपये की सहायता दिलाने के लिए मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट भेजी है।

 

सर्वाधिक पढ़ीं गईं