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खास खबर

आईएनएस ऑटोमोबाइल्स ने लॉन्च किया नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW

मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम आजमगढ़ । इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही आईएनएस ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ग्राहकों के लिए नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW बाजार में उतारा है। कंपनी का दावा है कि यह ई-रिक्शा मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम है, जो चालक और यात्रियों दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  कंपनी के अनुसार, IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW में मजबूत बॉडी, आकर्षक डिजाइन और आरामदायक सीटिंग व्यवस्था दी गई है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक सफर का अनुभव मिलता है। वहीं, चालक के लिए यह वाहन कम रखरखाव लागत और बेहतर कमाई का अवसर प्रदान करता है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि बढ़ती ई-रिक्शा मांग को देखते हुए इस मॉडल को आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता मानकों के साथ विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक भरोसेमंद और लाभदायक विकल्प उपलब्ध कराना है।आईएनएस ऑटोमोबाइल्स का मानना है कि यह नया मॉडल शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं को और अधिक सुगम बनाएगा। लॉन्च के साथ ह...

Lucknow: केंद्र की चेतावनी-बिजली कंपनियों के 9692 करोड़ रुपये चुकाए यूपी सरकार, नहीं तो रोक दी जाएगी आपूर्ति



केंद्रीय ऊर्जा सचिव आलोक कुमार ने प्रदेश के प्रमुख सचिव ऊर्जा को पत्र भेजकर कहा है कि जेनको का 9372.49 करोड़ तथा कोल इंडिया का 319.82 करोड़ रुपये बकाये का तत्काल भुगतान किया जाए नहीं तो प्रदेश की बिजली रोकी जा सकती है।

केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को बिजली उत्पादक कंपनियों (जेनको) व कोल इंडिया के 9692 करोड़ रुपये के बकाये का तत्काल भुगतान करने को कहा है। तत्काल भुगतान न करने पर प्रदेश की बिजली रोकने की भी चेतावनी दी गई है। केंद्र के इस कदम से वित्तीय संकट से जूझ रहे पावर कॉर्पोरेशन के सामने अतिरिक्त बिजली के इंतजाम के साथ भुगतान की चुनौती खड़ी हो गई है।

विदेशी कोयले की खरीद के बाद अब केंद्र ने प्रदेश सरकार पर जेनको व कोल इंडिया के बकाये के भुगतान का दबाव बढ़ा दिया है। केंद्रीय ऊर्जा सचिव आलोक कुमार ने प्रदेश के प्रमुख सचिव ऊर्जा को पत्र भेजकर कहा है कि जेनको का 9372.49 करोड़ तथा कोल इंडिया का 319.82 करोड़ रुपये बकाये का तत्काल भुगतान किया जाए नहीं तो प्रदेश की बिजली रोकी जा सकती है। केंद्र सरकार की इस चेतावनी ने पावर कॉर्पोरेशन व राज्य विद्युत उत्पादन निगम के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

दरअसल, हर महीने आपूर्ति की जा रही बिजली के अनुपात में राजस्व वसूली नहीं हो पा रही है जिससे पावर कॉर्पोरेशन नियमित रूप से जेनको और राज्य विद्युत उत्पादन निगम को बिजली का भुगतान नहीं कर पा रहा है। भुगतान न मिलने से उत्पादन निगम कोल इंडिया को भुगतान नहीं कर पा रहा है। चूंकि प्रदेश में बिजली की जबर्दस्त किल्लत है इसलिए पावर कॉर्पोरेशन को एनर्जी एक्सचेंज व अन्य स्रोतों से अतिरिक्त बिजली भी खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में तत्काल भुगतान करना बेहद मुश्किल हो रहा है।

उत्पादन निगम के अधिकारियों का कहना है कि अनुबंध के अनुसार पावर कॉर्पोरेशन जिन उत्पादन इकाइयों से बिजली खरीदता है उनको लगातार भुगतान करता रहता है और भुगतान में देरी पर 12 से 18 प्रतिशत तक ब्याज भी देना पड़ता है। बिजली संकट के दौर में इस तरह का दबाव बनाना सही नहीं है।

उधर, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से बकाये पर बिजली रोकने की धमकी देना असांविधानिक है। यह धमकी पावर कॉर्पोरेशन को नहीं, बल्कि प्रदेश के तीन करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को दी जा रही है।

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