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खास खबर

नवनिर्मित मकान में पसरा मातम, चैनल गेट में उतरे करंट ने ली महिला की जान

कटे बिजली के तार के संपर्क में आने से हुआ हादसा आजमगढ़। जिस नवनिर्मित मकान को संवारने में परिवार खुशियां तलाश रहा था, वहीं रविवार को एक हादसे ने खुशियां मातम में बदल दीं। मकान की साफ-सफाई कर रही 35 वर्षीय इंदु शर्मा की चैनल गेट में उतरे करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। मां की मौत से दो बच्चों के सिर से ममता का साया उठ गया। बसहिया पुरवा गांव निवासी इंदु शर्मा (35) पत्नी जोखू शर्मा रविवार सुबह करीब 11 बजे अपने नवनिर्मित मकान में झाड़ू-पोछा कर रही थीं। इसी दौरान चैनल गेट के पास पड़े कटे बिजली के तार के संपर्क में आने से गेट में करंट उतर आया। इसकी चपेट में आकर इंदु गंभीर रूप से झुलस गईं। परिजन उन्हें तत्काल 100 शैय्या अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इंदु के पति जोखू शर्मा नाई का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके दो बच्चे हैं। हादसे के बाद पति और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार की खुशियां पलभर में उजड़ गईं। घटना के संबंध में पति ने थाने में तहरीर देकर पोस्टमार्टम कराने की मांग की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज ...

यूपी चुनाव की तैयारी: भाजपा में पहले 14 जिलाध्यक्ष होंगे नियुक्त, फिर संगठन में बड़ा फेरबदल

नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने संगठनात्मक संतुलन सबसे बड़ी चुनौती

भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी। 

लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा ने संगठन को और मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी इस महीने के अंत तक शेष बचे 14 जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति करने जा रही है। इसके बाद प्रदेश और क्षेत्रीय स्तर पर संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू होगी।
नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी संगठन के तहत गठित 98 जिलों में लंबित पड़ी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को पूरा करना है। सूत्रों के अनुसार, पहले इन 14 जिलों में नियुक्तियां पूरी की जाएंगी, इसके बाद अगले महीने से प्रदेश स्तरीय संगठन में बदलाव को लेकर मंथन शुरू होगा।
गौरतलब है कि प्रदेश संगठन के चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडे द्वारा दो चरणों में 84 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की जा चुकी है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के बीच खींचतान और आपसी सहमति न बनने के कारण 14 जिलों में यह प्रक्रिया अधूरी रह गई थी। इनमें प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक, जिन जिलों में अभी नियुक्ति नहीं हो पाई है, उनमें अंबेडकरनगर, गोंडा, अयोध्या जिला व महानगर, वाराणसी जिला, चंदौली, मिर्जापुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, लखीमपुर, पीलीभीत, शामली, सहारनपुर और अमरोहा शामिल हैं। इन जिलों में क्षेत्रीय विधायकों और दावेदारों के बीच मतभेद के चलते सहमति नहीं बन सकी थी।
दरअसल, जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में जातीय समीकरण, जनप्रतिनिधियों की सिफारिशें और कई स्थानों पर मौजूदा अध्यक्षों की दोबारा या तीसरी बार दावेदारी ने प्रक्रिया को जटिल बना दिया। नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद अब इन सभी जिलों में संतुलन साधने की जिम्मेदारी सीधे उनके कंधों पर आ गई है।
नए पैनल पर होगा फैसला
सूत्र बताते हैं कि शेष 14 जिलों के लिए संबंधित क्षेत्रीय संगठनों से तीन-तीन नामों के नए पैनल मांगे गए हैं। पुराने पैनल उपलब्ध होने के बावजूद पंकज चौधरी ने नए सिरे से नाम भेजने के निर्देश दिए हैं। अंतिम निर्णय के बाद जिलाध्यक्षों की घोषणा की जाएगी, जिसके साथ ही प्रदेश और क्षेत्रीय संगठन में व्यापक फेरबदल का रास्ता साफ हो जाएगा।
पंकज चौधरी ने परिचयात्मक दौरों के जरिए कार्यकर्ताओं से संवाद शुरू कर दिया है और संकेत दिए हैं कि आगामी संगठनात्मक फैसलों में कैडर आधारित कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे स्पष्ट है कि इस बार नियुक्तियों में संगठनात्मक संतुलन के साथ जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम रहने वाली है।

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