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खास खबर

हाईवे पर मौत का जाल, जिम्मेदार बेखबर

 कहीं ट्रकों की अवैध पार्किंग तो कहीं सड़क पर गहरे गड्ढे, राहगीरों की जान जोखिम में हाइवे पर ट्रकों की पार्किंग और गड्ढे बढ़ा रहे हादसे का खतरा ट्रकों की अवैध पार्किंग और गड्ढों से हाइवे पर हादसों का खतरा एक लेन पर भारी वाहनों का कब्जा, रानी की सराय से कोटिला तक सड़क बदहाल आजमगढ़। जिले के नेशनल और स्टेट हाईवे पर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर भारी वाहनों की पार्किंग हादसों को न्योता दे रही है। हाईवे की पटरियों से लेकर एक लेन तक ट्रक और अन्य वाहन खड़े होने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रात के समय सड़क किनारे खड़े बड़े वाहनों के कारण बाइक, स्कूटी और चार पहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक खतरा रहता है। हादसा होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बढ़ती है, जबकि नियमित कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान कर खानापूर्ति किए जाने का आरोप है। जिले से आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-अयोध्या, आजमगढ़-गोरखपुर, आजमगढ़-बलिया, आजमगढ़ वाया शाहगंज-लखनऊ और आजमगढ़-प्रयागराज मार्ग गुजरते हैं। आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-प्रयागराज और आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग पर मोरंग, बालू, गिट्टी और बोल्डर लदे ...

जान दे देंगे लेकिन नहीं देंगे जमीन, इंटरनेशनल एयरपोर्ट भूमि अधिग्रहण मामला

धरने पर बैठी महिलाएं 

आजमगढ़। जिले में इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ 26 दिन से धरने पर बैठे किसान अब आर पार के मूड में दिख रहे हैं। पहले किसानों ने नारा दिया था जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे। लेकिन राजनीति दलों और सामाजिक तथा किसान संगठनों के समर्थन के बाद इन्होंने नारा भी बदल दिया है। अब इनका नारा है न जान देंगे न जमीन, जरूरत पड़ी तो करेंगे संग्राम।

 किसानों के समर्थन में रविवार को हरियाणा के किसान नेता गुरुनाम सिंह चढूनी, उत्तराखंड के किसान नेता जगतार सिंह बाजवा, संदीप पांडेय धरने में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं आगे राकेश टिकैत और मेधा पाटेकर आने वाली है। इससे आंदोलन को और बल मिल रहा है। किसान सरकार से दो-दो हाथ के लिए तैयार हैं। ऐसे में सरकार के लिए भूमि अधिग्रहण करना और इंटरनेशनल एअरपोर्ट बनाना आसान नहीं होगा। बता दें कि पिछले दिनों सरकार के आजमगढ़ के मंदुरी एअरपोर्ट को इंटरनेेशनल एयरपोर्ट बनाने की घोषणा की थी। अब इसके विस्तारीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण होना है। भूमि अधिग्रहण से आठ गांव की लगभग 40 हजार की आबादी प्रभावित हो रही है। तमाम लोगों के घर और जमीन एयरपोर्ट में जाने की संभावना है। इससे किसानों में भारी नाराजगी है। वे सरकार पर लगातार किसानों को उजाड़ने का आरोप लगा रहे है। पीड़ित किसान पिछले 26 दिनों से लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं प्रशासन तमाम प्रयास के बाद अब तक भूमि का सीमाकंन तक नहीं कर पाया है। पहले किसान कहते थे कि जान दे देंगे, पर जमीन नहीं दें लेकिन सपा, बसपा, कांग्रेस और किसान संगठनों के समर्थन के बाद अब इन्होंने नारा बदल दिया है। अब किसान न जान देंगे और ना ही जमीन का नारा बुलंद करते हुए इंटरनेशनल एयरपोर्ट का मास्टर प्लान वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। धरना के संयोजक किसान नेता राजीव यादव का कहना है कि उन्हें एयरपोर्ट नहीं चाहिए। हमारी जमीनों पर जिला प्रशासन के लोग कब्जा न करें। 12 और 13 अक्टूबर की रात जिला प्रशासन ने यहां की महिलाओं के साथ सर्वे के नाम पर अभद्रता की। इसको लेकर डीएम से मुलाकात भी किया, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। अब सवाल इन आठ गांवों का नहीं है, बल्कि गरीबों को उजाड़ने का है। इसके खिलाफ सभी लोग गोलबंद हो रहे हैं। यदि प्रशासन पीछे नहीं हटता है तो आने वाले दिनों में यहां पर किसान महापंचायत करेंगे। वहीं धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि हम लोग बहुत गरीब हैं। किसी तरह से अपने घर-परिवार की अजीविका चलाते हैं। ऐसे में यदि सरकार यहां से हम लोगों को हटाती है तो हम लोगों के सामने बड़ा संकट आ जाएगा। इस जमीन अधिग्रहण में हसनपुर, कादीपुर हरिकेश, जमुआ, जोलहा, गदनपुर,हिंछन पट्टी, मंदुरी, जेहरा पिपरी, जिगिना गांव आ रहे हैं। इतनी बड़ी आबादी आखिर कहां जाएगी।

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