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खास खबर

आईएनएस ऑटोमोबाइल्स ने लॉन्च किया नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW

मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम आजमगढ़ । इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही आईएनएस ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ग्राहकों के लिए नया IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW बाजार में उतारा है। कंपनी का दावा है कि यह ई-रिक्शा मजबूती, आराम और बेहतर प्रदर्शन का बेहतरीन संगम है, जो चालक और यात्रियों दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  कंपनी के अनुसार, IDEAL BULLDOZER E-RICKSHAW में मजबूत बॉडी, आकर्षक डिजाइन और आरामदायक सीटिंग व्यवस्था दी गई है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक सफर का अनुभव मिलता है। वहीं, चालक के लिए यह वाहन कम रखरखाव लागत और बेहतर कमाई का अवसर प्रदान करता है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि बढ़ती ई-रिक्शा मांग को देखते हुए इस मॉडल को आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता मानकों के साथ विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक भरोसेमंद और लाभदायक विकल्प उपलब्ध कराना है।आईएनएस ऑटोमोबाइल्स का मानना है कि यह नया मॉडल शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं को और अधिक सुगम बनाएगा। लॉन्च के साथ ह...

ठेले पर बेटे को लेकर भटक रहे बुजुर्ग दंपत्ति को मिला दीनू जायसवाल का सहारा


आजमगढ़। अपने कलेजे के टुकड़े को ठेले पर लादकर इलाज के लिए दर-ब-दर भटक रहे नाउम्मीद हो चुके बुजुर्ग पिता को समाजसेवी अभिषेक जायसवाल दीनू का साथ मिल जाने से उनकी लाचारी, बेबसी पर मानवीयता का मरहम लग गया। समाजसेवी अभिषेक जायसवाल दीनू ने न सिर्फ उनके जवान पुत्र को अस्पताल में भर्ती कराया बल्कि कालीनगंज स्थित आईपी सिटी अस्पताल प्रशासन से मिलकर उनके बेहतर उपचार की दिशा में दवा आदि में हरसंभव मदद किए जाने का आश्वासन दिया।

बताया जाता है कि नगर के सिधारी के हाईडिल के समीप निवासी हरिश्चन्द्र को ठेला चलाकर किसी तरह दो वक्त की रोटी मयस्सर हो पाती है। इसी कठिनाईयों के बीच इनके पुत्र निखिल के पैरों में कई दिनों से परेशानी उत्पन्न हो गई थी, आर्थिक विपन्नता के कारण इलाज में देरी हो गया और हालत हुई कि वह नित्य क्रिया में भी असमर्थ हो गया। ठेला चालक हरिश्चन्द्र ने अपनी माली हालत को देखते हुए किसी तरह आष्युमान कार्ड बनवाया था लेकिन वक्त की मार ही थी कि जब पुत्र निखिल को स्वास्थ्य की समस्या हुई तो आयुष्मान कार्ड के बावजूद उसे उपचार नहीं मिल पाया। हरिश्चन्द्र का आरोप कि किसी अस्पताल ने उनका साथ नहीं दिया बल्कि जिला अस्पताल से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। जवान बीमार बेटे निखिल को जिला अस्पताल से ठेला पर लादकर अपने पत्नी के साथ घर लौटने को मजबूर हो गया। जैसे ही डीएवी के पास समाजसेवी अभिषेक जायसवाल दीनू की नजर बुजुर्ग दम्पत्ति पर पड़ी तो उन्होंने इन्हें रोकवाया और इनकी आपबीती को सुना। बुर्जुग दम्पत्ति ने बिलखते हुए अपने बेटे की परेशानी का हवाला दिया तो तत्काल दीनू जायसवाल ने मदद की आश्वासन दिया और इन्हें शहर के आईपीसीटी हास्पिटल पर लेकर आए और वहां अपने हाथों से उनके पुत्र को ठेले से उतारा और अपनी निगरानी में आईपी सिटी हास्पिटल के चिकित्सक डा नवनीत जायसवाल से मुलाकात कराया। समाजसेवी दीनू जायसवाल ने आश्वासन दिया कि इनके इलाज के लिए जो भी होगा उसके लिए वह यथासम्भव मदद करेंगे और एक लाचार पिता के आंसुओं को पोंछने का काम करेंगे। उधर, माली हालत को देखते हुए डा नवनीत जायसवाल ने भी अस्पताल प्रशासन की तरफ से भी हरसंभव मदद की बात कहीं है। बहरहाल, भले ही दीनू जायसवाल की मदद से बुर्जुग दम्पत्ति के बुढ़ापे की लाठी को बेहतर इलाज मिल गया हो लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी वायरल हुई बेबसी ने बहुतेरे समाजिक दलों और व्यवस्थाओं की संवेदनहीनता पर नश्तर चलाते हुए सभी को कठघरे में खड़ा कर दिया है।





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