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खास खबर

हाईवे पर मौत का जाल, जिम्मेदार बेखबर

 कहीं ट्रकों की अवैध पार्किंग तो कहीं सड़क पर गहरे गड्ढे, राहगीरों की जान जोखिम में हाइवे पर ट्रकों की पार्किंग और गड्ढे बढ़ा रहे हादसे का खतरा ट्रकों की अवैध पार्किंग और गड्ढों से हाइवे पर हादसों का खतरा एक लेन पर भारी वाहनों का कब्जा, रानी की सराय से कोटिला तक सड़क बदहाल आजमगढ़। जिले के नेशनल और स्टेट हाईवे पर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर भारी वाहनों की पार्किंग हादसों को न्योता दे रही है। हाईवे की पटरियों से लेकर एक लेन तक ट्रक और अन्य वाहन खड़े होने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रात के समय सड़क किनारे खड़े बड़े वाहनों के कारण बाइक, स्कूटी और चार पहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक खतरा रहता है। हादसा होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बढ़ती है, जबकि नियमित कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान कर खानापूर्ति किए जाने का आरोप है। जिले से आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-अयोध्या, आजमगढ़-गोरखपुर, आजमगढ़-बलिया, आजमगढ़ वाया शाहगंज-लखनऊ और आजमगढ़-प्रयागराज मार्ग गुजरते हैं। आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-प्रयागराज और आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग पर मोरंग, बालू, गिट्टी और बोल्डर लदे ...

मूर्ति विसर्जन के दौरान नहर में डूबा युवक

नहाने के लिए कूदा, गहरे पानी में चला गया

तीन घंटे बाद बाहर निकाला गया शव

मऊ। मधुबन थाना क्षेत्र के चचाई पार गांव के पास शहीद रोड पर बुधवार शाम लक्ष्मी प्रतिमा विसर्जन के समय एक युवक नहर में डूब गया। विसर्जन के बाद वह पुल से कूदकर नहर में नहाने के लिए गया। फिर गहरे पानी में जाने से डूब गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने युवक को काफी तलाशा। बाद में शव को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। उसका शव नहर में विसर्जित प्रतिमा के नीचे दबा मिला था।

 मामला मधुबन थाना क्षेत्र के ताल चंवर गांव का है। गांव में लक्ष्मी प्रतिमा स्थापित की गई थी। बुधवार को गांव के युवक प्रतिमा को विसर्जन के लिए टैक्टर से शहीद रोड पर चचाई पार से दक्षिण जनई नाले पर बने पुल के पास ले गए। वहां प्रतिमा को विसर्जित करने के बाद जितेंद्र यादव के साथ गांव के ही धनंजय और मनोज पुल से नहर में छलांग लगाकर नहाने लगे। इसी दौरान जितेंद्र गहरे पानी में चला गया। उसे पानी में डूबता देख उसके साथियों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हो सके। युवकों के शोर मचाने पर आसपास के काफी लोग इकट्ठा हो गए। लोगों ने जितेंद्र की तलाश करना शुरू किया, लेकिन कुछ पता नहीं चला। सूचना पर नायब तहसीलदार अभय प्रताप सिंह, सीओ मधुबन अभय कुमार सिंह, थाना प्रभारी सुधेश कुमार सिंह भी मौके पर पहुंच गए। लगभग 2 घंटे के प्रयास के बाद रात करीब 9 बजे जितेंद्र का शव विसर्जित की गई प्रतिमा के नीचे ही फंसा हुआ पाया गया। जितेंद्र अपने माता पिता का इकलौता संतान था। वह गुजरात के सूरत में रहकर नौकरी करता था। दीपावली पर्व मनाने के लिए दस दिन पूर्व ही घर आया था। जितेंद्र की मां का निधन काफी सालों पहले ही हो चुका है। हादसे के बाद जितेंद्र के पिता और बुजुर्ग दादी फूलमती का रो रोकर बुरा हाल है। वहीं घटना के बाद गांव में भी मातम छाया हुआ है ।

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