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बाजबहादुर में पैतृक मकान विवाद में दो पक्ष आमने-सामने, दोनों ने दर्ज कराया मुकदमा

मरम्मत और निर्माण कार्य को लेकर हुआ विवाद, पुलिस ने शुरू की जांच आजमगढ़। शहर कोतवाली क्षेत्र के बाजबहादुर मोहल्ले में पैतृक मकान और निर्माण कार्य को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पहले पक्ष के मो. अनस पुत्र अब्दुल कुद्दूस ने आरोप लगाया कि 28 जुलाई को वह अपने पैतृक मकान की मरम्मत करा रहे थे। इसी दौरान पुराने विवाद को लेकर विपक्षी पक्ष के लोग मौके पर पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए निर्माण कार्य रुकवाने लगे। विरोध करने पर कुल्हाड़ी, लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया, जिससे वह और बीच-बचाव करने आए उनके परिजन घायल हो गए। आरोप है कि जाते समय विपक्षियों ने जान से मारने की धमकी भी दी। वहीं दूसरे पक्ष के मो. आमिर पुत्र अब्दुल सलाम ने अपनी तहरीर में कहा कि पैतृक मकान का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद विपक्षी पक्ष जबरन निर्माण कार्य करा रहा था। रोकने पर पहले से टांगी, लोहे की रॉड और ल...

Jaunpur: पूर्व सांसद उमाकांत यादव को सजा तय

जज ने गिल्टी होल्ड रखा फैसला

 27 साल पहले सरेआम गोलियों से भूना था

जौनपुर। मछलीशहर लोकसभा के पूर्व सांसद उमाकांत यादव को 27 साल पुराने मामले में जौनपुर न्यायालय ने सजा तय की है। कोर्ट ने इस मामले में सात लोगों को आरोपी मानते हुए गिल्टी होल्ड की है। कोर्ट में आठ अगस्त को सजा सुनाई जाएगी। दरसअल, चार फरवरी 1995 को जौनपुर के शाहगंज जीआरपी लॉकअप में बंद राजकुमार यादव को छुड़ाने के दौरान सिपाही अजय सिंह की मौत हो गई थी। वहीं लल्लन सिंह और एक अन्य व्यक्ति गोली लगने से घायल हो गए थे। जौनपुर की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट नम्बर तीन ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद ये फैसला सुनाया है।

  शाहगंज जीआरपी में तैनात सिपाही रघुनाथ सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि 4 फरवरी 1995 को दोपहर लगभग 2 बजे रायफल, पिस्टल और रिवॉल्वर से लैस होकर आरोपी उमाकान्त यादव अपने सहयोगियों के साथ आ धमका। उमाकान्त ने लॉकअप में बंद राजकुमार यादव को जबरन छुड़ाने का प्रयास किया। इस दौरान आरोपी अंधाधुंध फायरिंग करने लगे। फायरिंग के कारण आसपास के क्षेत्र में दहशत फैल गयी। गोलीबारी में सिपाही अजय सिंह की मौत हो गयी। इस मामले में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दायर की। चार्जशीट में उमाकांत यादव, राजकुमार यादव, धर्मराज यादव, महेंद्र, सूबेदार और बच्चूलाल समेत सात लोगों को आरोपी बनाए गया। इस मामले में पत्रावली एमपी एमएलए कोर्ट में हस्तांतरित की गई थी। बाद में इसको हाईकोर्ट के निर्देश पर दीवानी न्यायालय जौनपुर में स्थानांतरित किया गया। सीबीसीआईडी द्वारा मुकदमे की मॉनिटरिंग की जा रही थी।

8 अगस्त को सुनाई जाएगी सजा

इस मामले में जानकारी देते हुए शासकीय अधिवक्ता लाल बहादुर पाल ने बताया कि उमाकान्त समेत सभी अन्य लोगों पर आरोप तय हो गया है। दीवानी न्यायालय की कोर्ट नम्बर 3 ने इस मामले पर गिल्टी होल्ड रख लिया है। इस मामले में 8 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि मुख्यतः धारा 302 के अंतर्गत आरोप को संज्ञान में रखते हुए आरोप तय किया गया है


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