सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

खास खबर

हाईवे पर मौत का जाल, जिम्मेदार बेखबर

 कहीं ट्रकों की अवैध पार्किंग तो कहीं सड़क पर गहरे गड्ढे, राहगीरों की जान जोखिम में हाइवे पर ट्रकों की पार्किंग और गड्ढे बढ़ा रहे हादसे का खतरा ट्रकों की अवैध पार्किंग और गड्ढों से हाइवे पर हादसों का खतरा एक लेन पर भारी वाहनों का कब्जा, रानी की सराय से कोटिला तक सड़क बदहाल आजमगढ़। जिले के नेशनल और स्टेट हाईवे पर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर भारी वाहनों की पार्किंग हादसों को न्योता दे रही है। हाईवे की पटरियों से लेकर एक लेन तक ट्रक और अन्य वाहन खड़े होने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रात के समय सड़क किनारे खड़े बड़े वाहनों के कारण बाइक, स्कूटी और चार पहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक खतरा रहता है। हादसा होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता बढ़ती है, जबकि नियमित कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान कर खानापूर्ति किए जाने का आरोप है। जिले से आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-अयोध्या, आजमगढ़-गोरखपुर, आजमगढ़-बलिया, आजमगढ़ वाया शाहगंज-लखनऊ और आजमगढ़-प्रयागराज मार्ग गुजरते हैं। आजमगढ़-वाराणसी, आजमगढ़-प्रयागराज और आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग पर मोरंग, बालू, गिट्टी और बोल्डर लदे ...

Devshayani Ekadashi 2022: देवशयनी एकादशी पर बन रहा विशेष संयोग, इस शुभ मुहूर्त में ऐसे करें विष्णु जी की पूजा


Devshayani ekadashi 2022 आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु 4 माह के लिए योग निद्रा में चल जाते हैं। जानिए देवशयनी एकादशी का शुभ मुहूर्त पूजा विधि और शयन मंत्र। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जानते हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से ही भगवान विष्णु अगले चार मास के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इसी कारण इस एकादशी को हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा इस एकादशी को आषाढ़ी एकादशी, पद्मनाभा एकादशी के नाम से भी जानते है। देवशयनी एकादशी का काफी अधिक महत्व है। क्योंकि इसके साथ ही भगवान विष्णु अगले चार मास के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं और मांगलिक कार्यों की मनाही हो जाती है। जानिए देवशयनी एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र।


देवशयनी एकादशी का शुभ मुहूर्त

देवशयनी एकादशी की तिथि- 10 जुलाई 2022

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी प्रारंभ- 9 जुलाई शाम 4 बजकर 39 मिनट से

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का समापन- 10 जुलाई दोपहर 2 बजकर 13 मिनट तक

अनुराधा नक्षत्र- 10 जुलाई सुबह 9 बजकर 55 मिनट से 11 जुलाई सुबह 07 बजकर 50 मिनट तक

Bhadli Navami 2022: भड़ली नवमी आज, विवाह, खरीदारी और गृह प्रवेश के लिए बन रहा अबूझ मुहूर्त यह भी पढ़ें


शुभ योग - 10 जुलाई सुबह 4 बजकर 2 मिनट से 11 जुलाई सुबह 12 बजकर 45 मिनट तक।

पारण का समय- 11 जुलाई सुबह 5 बजकर 52 मिनट से 11 जुलाई सुबह 8 बजकर 32 मिनट पर।

देवशयनी एकादशी की पूजा विधि एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत तरीके से पूजा की जाती है।देवशयनी एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों ने निवृत्त होकर स्नान आदि कर लें।भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।अब भगवान विष्णु की पूजा आरंभ करें।पहले थोड़ा सा जल छिड़ककर भगवान को फूल, माला, पीला चंदन, रोली, अक्षत चढ़ाने दें।अब भोग लगाने के साथ तुलसी दल चढ़ा दें।फिर जल चढ़ाने के साथ दीपक-धूप जला दें।विष्णु चालीसा के साथ सहस्त्रनाम का पाठ कर लें।अंत में विधिवत आरती कर लें।

भगवान विष्णु जी को सुलाते समय करें इन मंत्र का उच्चारण

सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत सुप्तं भवेदिदम।

विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत सर्वं चराचरम।'

सर्वाधिक पढ़ीं गईं