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बाजबहादुर में पैतृक मकान विवाद में दो पक्ष आमने-सामने, दोनों ने दर्ज कराया मुकदमा

मरम्मत और निर्माण कार्य को लेकर हुआ विवाद, पुलिस ने शुरू की जांच आजमगढ़। शहर कोतवाली क्षेत्र के बाजबहादुर मोहल्ले में पैतृक मकान और निर्माण कार्य को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पहले पक्ष के मो. अनस पुत्र अब्दुल कुद्दूस ने आरोप लगाया कि 28 जुलाई को वह अपने पैतृक मकान की मरम्मत करा रहे थे। इसी दौरान पुराने विवाद को लेकर विपक्षी पक्ष के लोग मौके पर पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए निर्माण कार्य रुकवाने लगे। विरोध करने पर कुल्हाड़ी, लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया, जिससे वह और बीच-बचाव करने आए उनके परिजन घायल हो गए। आरोप है कि जाते समय विपक्षियों ने जान से मारने की धमकी भी दी। वहीं दूसरे पक्ष के मो. आमिर पुत्र अब्दुल सलाम ने अपनी तहरीर में कहा कि पैतृक मकान का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद विपक्षी पक्ष जबरन निर्माण कार्य करा रहा था। रोकने पर पहले से टांगी, लोहे की रॉड और ल...

Azamgarh: खाड़ी देशों के खजूर की बाजारों में बढ़ी मांग

आजमगढ़। बाजार में खाड़ी देशों के खजूर खूब धूम मचा रहे हैं। रमजान में रोजा में मुस्लिम समाज के लिए इफ्तारी में खजूर खाना सुन्नत माना गया है।
रोजेदार रोजाना शाम को मगरिब की अजान के बाद खजूर खाकर रोजा इफ्तार करते हैं। इन दिनों बाजार में विभिन्न नामों के खाड़ी देशों के खजूर बिक रहा है। रमजान का मुबारक माह में खजूर हर मुस्लिम समाज में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मुबारकपुर, सरायमीर, देवगांव, फूलपुर समेत सभी बड़े बाजारो में सऊदी अरबिया के मदीना, रेयाज, दमाम, जिदह, दुबई, कतर, बोरनई आदि खाड़ी देशों के खजूर लोग खरीद रहे हैं। हालांकि महंगाई का असर खजूर पर साफ दिख रहा है। बाजारों में सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक बाजार में खजूर मौजूद है। मुबारकपुर के दुकानदार अलाउद्दीन अहमद ने बताया कि बाजार में एक सौ से एक हजार रुपये तक खजूर उपलब्ध हैं। इनमें कलमी चार सौ से लेकर पांच सौ रुपये तक, मशरूख की चार सौ से लेकर साढ़े चार सौ रुपये तक, मबरूम का पांच सौ रुपये, अराफात का 280 रुपये, मरियम 250 रुपये अजवा का एक हजार रुपये, जहीरी 140 रुपये के नामें से खजूर बाजारों में बिक रहा है।

इफ्तार में खजूर से रोजा खोलना सुन्नत

आजमगढ़। रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय अपना रोजा खोलने से पहले खजूर खाना पसंद करते हैं। मौलाना रहमतुल्लाह मिस्बाही ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब को खजूर बहुत पसंद था। य्वे भी खजूर खाकर ही रोजा खोलते थे। इस लिए पाक महीने में रोजा रखने वाले मुस्लिम पैगंबर साहब की सुन्नत का पालन करते हुए अपना रोजा खोलते हैं। अगर किसी के पास खजूर नहीं होता है तो वह एक पानी से भी रोजा खोल सकता है।


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